यूनिवर्सिटी में छात्रनेता ने विरोधस्वरूप ली जमीन में गर्दन तक समाधि, पहले चढ़े थे छात्र कुलपति की छत पर
जयपुर । राजस्थान यूनिवर्सिटी में एक छात्र नेता ने जमीन में गर्दन तक समाधि ले ली। छात्र नेता खुद पर दर्ज मुकदमे समेत तीन मांगों काे पूरा नहीं करने का विरोध कर रहा है। समाधि के पास स्टूडेंट्स भी धरने पर बैठे हुए हैं। अपनी तीन मांगों को लेकर छात्रनेता हरफूल चौधरी यूनिवर्सिटी में गुरुवार […]
जयपुर । राजस्थान यूनिवर्सिटी में एक छात्र नेता ने जमीन में गर्दन तक समाधि ले ली। छात्र नेता खुद पर दर्ज मुकदमे समेत तीन मांगों काे पूरा नहीं करने का विरोध कर रहा है। समाधि के पास स्टूडेंट्स भी धरने पर बैठे हुए हैं।
अपनी तीन मांगों को लेकर छात्रनेता हरफूल चौधरी यूनिवर्सिटी में गुरुवार सुबह प्रदर्शन कर रहा था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की मांग पर कोई जवाब नहीं दिया। आखिरकार नाराज होकर हरफूल चौधरी दोपहर में सेंट्रल लाइब्रेरी के बाहर जमीन समाधि में बैठ गया। उसने कहा कि जब तक उनकी तीन सूत्री मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा। उसका विरोध जारी रहेगा।
ये भी पढ़ें भीषण सड़क हादसा: ट्रेलर में पीछे से घुसी तेज रफ्तार कार, महिला समेत 5 लोगों की दर्दनाक मौतचौधरी ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर तानाशाही करने का आरोप लगाया। चौधरी ने कहा कि राजस्थान की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में 2 महीने पहले सेंट्रल लाइब्रेरी का उद्घाटन हो चुका है। अब तक छात्रों के लिए इसे शुरू नहीं किया गया है। जबकि छात्रों के सेमेस्टर एग्जाम शुरू हो चुके हैं। ऐसे में जल्द से जल्द लाइब्रेरी स्टूडेंट्स के लिए शुरू होनी चाहिए।
छात्रनेता ने कहा कि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने आम छात्रों के पैसों से भ्रष्टाचार किया है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके लिए उनके खिलाफ जांच कमेटी का गठन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे पहले मैंने यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के लिए प्रदर्शन किया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से हम 150 छात्रों पर राज्य कार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज करा दिया गया । जो पूरी तरह से तानाशाही है। अगर यूनिवर्सिटी में ही छात्र अपनी बात को नहीं रख सकेगा तो फिर आम छात्र अपने अधिकार के लिए कहां बोलेगा। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से दर्ज मुकदमा वापस लिया जाना चाहिए।
यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर हरि पलसानिया ने कहा कि यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए ही लाइब्रेरी बनाई गई है। जहां फिलहाल काम जारी है। जैसे ही काम कंप्लीट होगा लाइब्रेरी छात्रों के लिए खोल दी जाएगी। आधे अधूरे काम के साथ छात्रों के लिए लाइब्रेरी खोल पाना फिलहाल संभव नहीं है।
पलसानिया ने कहा कि छात्रों पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई थी। वह रजिस्ट्रार की ओर से दर्ज करवाई गई है। ऐसे में इस मामले में मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगा। छात्रों के प्रदर्शन का यह तरीका पूरी तरीके से गलत है। इससे यूनिवर्सिटी का माहौल बिगड़ता है। इस मामले की पुलिस प्रशासन में शिकायत करूंगा।
इससे पहले छात्र नेता हरफूल चौधरी ने प्रोफेसर के प्रमोशन की मांग को लेकर कुलपति सचिवालय पर 4 और 5 जनवरी को प्रदर्शन किया था। इस दौरान कुछ छात्र कुलपति सचिवालय की छत पर चढ़ गए थे।
वहीं देर रात तक हरफूल कुलपति सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे रहे थे। हालांकि लगातार बढ़ते प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रोफेसर को प्रमोशन दिया। छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई थी। जिसको लेकर अब छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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