रॉयल बुलेटिन एक्सक्लूसिव सर्वे: मुजफ्फरनगर की जनता की अदालत में 'फेल' हुए मंत्री जी ! 72 % लोग विकास से असंतुष्ट
15 साल की सत्ता पर भारी पड़ा जनता का गुस्सा; फोटो खिंचवाने और दिखावे की राजनीति पर चला 'शब्दों का बुलडोजर'
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'अपनों' के बीच घिरे रहने वाले राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के 15 साल के कार्यकाल और मौजूदा विकास दावों पर 'रॉयल बुलेटिन' ने एक बड़ा डिजिटल सर्वे किया। सोशल मीडिया पर आए सैकड़ों कमेंट्स और फीडबैक के आधार पर जो तस्वीर उभर रही है, वह मंत्री जी के लिए खतरे की घंटी है। जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें 'चमक-दमक' वाले गेट और केवल ब्याह शादी और दुःख में उपस्थिति नहीं, बल्कि धरातल पर बुनियादी सुविधाएं चाहिए।
शहर के विकास और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई। फेसबुक पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल के कार्यकाल को लेकर किए गए सवाल पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय रखी। 158 लोगों ने टिप्पणी कर अपने अनुभव साझा किए। कमेंट्स के आधार पर देखा जाए तो अधिकांश प्रतिक्रियाएं आलोचनात्मक रहीं, जबकि कुछ लोगों ने मंत्री के व्यवहार और कुछ विकास कार्यों को सकारात्मक बताया। कई लोगों ने अपने-अपने वार्ड और मोहल्लों की समस्याएं भी खुलकर सामने रखीं।
समर्थन करने वालों ने गिनाईं उपलब्धियां
कुछ लोगों ने मंत्री के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे जमीन से जुड़े नेता हैं और जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं।
अमित गुप्ता ने लिखा कि मंत्री सभी के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं और लोगों की समस्याएं सुनते हैं।
नितिन मित्तल ने अपने कमेंट में लिखा कि मंत्री के प्रयासों से कई विकास कार्य हुए हैं, जिनमें मुजफ्फरनगर-शामली रोड रिंग रोड, संधावली जोली रोड पर पुल, रेशु विहार फाटक अंडरपास और कई सड़कों का निर्माण शामिल है।
रोहित जैन और नवीन गोयल ने कहा कि प्रेमपुरी क्षेत्र में पुराने कूड़ाघर की समस्या का समाधान और ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग का काम मंत्री और नगरपालिका अध्यक्ष के सहयोग से हुआ।
अमित सुधा ने लिखा कि मंत्री कपिल देव अग्रवाल सभी समाज के लोगों के साथ खड़े रहते हैं और जमीन से जुड़े नेता हैं।
शिव वर्मा का कहना था कि उनकी नजर में पिछले विधायकों की तुलना में वर्तमान मंत्री ने बेहतर काम किया है।
ये भी पढ़ें ग्रेटर नोएडा: बादलपुर में ट्रेन की चपेट में आने से महिला समेत दो की मौत; पुलिस शिनाख्त में जुटीप्रकाश सूना ने लिखा कि जितना एक विधायक/मंत्री कर सकता है उतना कपिल देव अग्रवाल कर रहे हैं फिर भी जनपद को एक बड़े स्तर के शासकीय उपक्रम की आवश्यकता है।
अनूप गोयल ने कहा कि कई समस्याओं के लिए नागरिक भी जिम्मेदार हैं और लोगों को भी स्वच्छता व यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। मंत्री जी जैसा जननेता हो ही नही सकता।
अशोक कुमार शर्मा, मनोज मित्तल, राम कुमार तायल, मुसर्रत ज़ैदी, राकेश मित्तल, विजयेंद्र गुप्ता और सुनील कुमार गोयल जैसे कई लोगों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और मंत्री के व्यवहार व कार्यशैली की सराहना की।
विरोध करने वालों ने उठाए बड़े सवाल
दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोगों ने मंत्री के कार्यकाल को लेकर नाराजगी जताई और शहर में विकास कार्यों की कमी का आरोप लगाया।
दीपांशु गुप्ता का कहना है— "सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए हैं, आम आदमी मिलने जाए तो मिलते नहीं, पावरफुल आदमी के लिए तुरंत हाजिर हैं।"
सौरभ मित्तल ने पूछा— "11 साल में वैश्य समाज या आम जनता की किसी समस्या का समाधान किया हो तो बताया जाए।"
आकाश सिंह ग्रेवाल ने लिखा कि मै BJP का कट्टर समर्थक हूं लेकिन कपिल देव अग्रवाल किसी मर्ज की दवा नहीं हैं , इन्हें अपने क्षेत्र के किसानों से ज्यादा उद्योगपतियों की फिक्र है , इनकी होर्डिंग कंपनी पेड़ों को काट कर अपने होर्डिंग स्थापित करती है। BJP इन्हें सभासद का भी टिकट इस बार देगी तो ये जीतेंगे नहीं।
दीपक वर्मा ने कहा कि शहर के लिए कोई बड़ी उपलब्धि दिखाई नहीं देती और विकास केवल कुछ लोगों तक सीमित है।
ममता शर्मा ने टिप्पणी की कि 15 साल पहले शहर जैसा था, आज भी लगभग वैसा ही है।
तुषार गौतम ने लिखा कि मंत्री से संपर्क करना भी मुश्किल है और आम लोगों की सुनवाई नहीं होती।
नीलम गौतम और मोहम्मद जुबैर ने साफ कहा कि 10 साल में शहर में कोई ठोस उपलब्धि नजर नहीं आती।
वरदान ब्राह्मण का कहना है कि मंत्री जी केवल उद्घाटन करने आते हैं, शहर की समस्याओं से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
वसंत गर्ग ने लिखा कि कोई विकास नहीं किया। मिंटू सैनी ने तो लिख दिया-ख़त्म है।
भारत खोकर- मंत्री ने केवल अपना ही विकास किया है, जनता को नजरबंद रखा, अब 2027 विधानसभा चुनाव में मंत्री जी को 440 वाल्ट का झटका मुजफ्फरनगर की जनता देगी, कपिलदेव अग्रवाल चुनाव हारेंगे।
राजेश मोगा, अभिषेक जैन, प्रिंस गर्ग, मन्नू तोमर, दीपांशु अग्रवाल,, दिनेश शर्मा और सोनू कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर शहर में कुछ नहीं किया बल्कि केवल अपना विकास खूब किया।
अमित शर्मा ने तीखा प्रहार किया— "सारे हिंदुस्तान का कचरा हमारे शहर में जल रहा है और साहब चुप हैं। पहले जीवन है, फिर तरक्की।"
सीमा बक्शी ने बंदरों के आतंक और प्रदूषण को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताया।
दीपक राणा ने कहा कि परिक्रमा मार्ग की सड़क वर्षों से खराब पड़ी है।
नितिन कुमार बारी ने जनकपुरी क्षेत्र की सड़क और जलभराव की समस्या का जिक्र किया।
अशोक कुमार पाराशर ने गुलशन बिहार क्षेत्र में जल निकासी की खराब स्थिति बताई।
वंदना राज वत्स ने वार्ड संख्या 13 में सड़क निर्माण का वादा पूरा न होने की शिकायत की। सरवट फाटक की भी समस्या हल नहीं हुई। \
नवाब सिंह ने कहा कि इस बार तो टिकट ही नहीं मिलना चाहिए।
अरमान मिर्ज़ा ने कहा कि जब केंद्र और प्रदेश दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है और सांसद भी उसी दल के रहे हैं, तब भी शहर को कोई बड़ा प्रोजेक्ट क्यों नहीं मिला। उन्होंने सुझाव दिया कि करोड़ों के गेट बनाने के बजाय फ्लाईओवर्स और सड़कों के चौड़ीकरण की जरूरत थी।
नितिन कुमार (वार्ड 32) ने चेतावनी दी— "8 साल से वीडियो भेज रहा हूँ, कोई सुनवाई नहीं। इस बार 'नोटा' दबेगा।"
सर्वे में एक गंभीर पहलू 'जातिगत विकास' का सामने आया। मोहित कल्याणिया ने आरोप लगाया कि— "मंदिर के पास कूड़ा भरा रहता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अधिक ध्यान दिया जाता है। विकास कार्यों में जातीय भेदभाव स्पष्ट दिखता है।"
इसके अलावा प्रिंस गर्ग, मोहम्मद जुबैर तोमर, जमाल अख्तर, विपुल तेजयान, सुनील चंदेल, देशपाल सिंह धनगर, नीरज शर्मा, विपुल अग्रवाल, पुलकित कुमार अग्रवाल, नितिन कश्यप, लोकेंद्र तायल, रविंद्र जैन, कृष्णा धीमन, शानू गुप्ता, तानिश जाट, अतार सिंह बालियान सहित कई लोगों ने भी असंतोष जताया।
तटस्थ लोगों ने दिए सुझाव
कुछ लोगों ने आलोचना के साथ-साथ सुझाव भी दिए कि शहर की प्रमुख समस्याओं का समाधान कैसे किया जा सकता है।
अरमान मिर्ज़ा ने सहारनपुर अड्डा से सुजड़ू तक फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया ताकि ट्रैफिक जाम कम हो सके।
नीरज शर्मा ने विश्वकर्मा चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की मांग की।
लोकेंद्र तायल ने महावीर चौक से पंचशील कॉलोनी मार्ग चौड़ा करने का सुझाव दिया।
इन लोगों ने भी दी प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया चर्चा में अवनीश कुमार, राहुल कुमार, मोहम्मद आसिफ, सौरभ मित्तल, काजी मुस्तकीम, सलीम खान, योगेश जैन, कुलदीप मलिक, अनमोल त्यागी, सचिन अरोड़ा, मिंटू धीमान, जॉनी पंडित, गौतम जैन, संदीप सु, अमित जांगिड़, लोकेश तायल, रजत सिंह, संजीव जैन, नवीन गोयल, शकील राइडर खान, निशा वर्मा समेत कई अन्य लोगों ने भी अपनी राय रखी।
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इनमें कुछ ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी, जबकि कुछ ने स्थानीय समस्याओं को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।
सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि शहर के विकास को लेकर जनता की राय एकमत नहीं है। जहां कुछ लोग मंत्री के कामकाज और व्यवहार की सराहना कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग शहर की बुनियादी समस्याओं—जैसे सड़क, जल निकासी, ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण, प्रदूषण और सफाई व्यवस्था—पर असंतोष जता रहे हैं।
निष्कर्ष: 2027 की राह कठिन
सर्वे का निष्कर्ष यह है कि मुजफ्फरनगर की जनता अब केवल 'व्यवहार' और 'पार्टी के नाम' पर संतुष्ट होने वाली नहीं है। 72% जनता का मानना है कि शहर को जाम, प्रदूषण, जलभराव और अतिक्रमण से मुक्ति नहीं मिली। करोड़ों के 'प्रवेश द्वार' जनता की इन बुनियादी शिकायतों के आगे बौने साबित हो रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर उठ रही ये आवाजें आने वाले समय में स्थानीय राजनीति और चुनावी माहौल पर भी असर डाल सकती हैं। देखें फेसबुक का पूरा सर्वे- https://www.facebook.com/share/p/1AshCBPDdh/
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