मुजफ्फरनगर बना 'गैस चैंबर', रॉयल बुलेटिन का महा-सर्वे: कौन है असल जिम्मेदार ?, बताएं अपनी राय, हम बनेंगे आपकी आवाज !
मार्च में कोहरे और प्रदूषण का तांडव, AQI 278 पहुंचा; शून्य विजिबिलिटी से थमी रफ्तार, सांस लेना हुआ दूभर
मुजफ्फरनगर। सर्दियों की विदाई के बाद मार्च के महीने में मुजफ्फरनगर की जनता पर 'प्रदूषण' और 'जहरीली धुंध' का दोहरा प्रहार हुआ है। शहर की आबोहवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि बुधवार सुबह एक्यूआई (AQI) स्तर 278 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। मिड-मार्च में कोहरे और स्मॉग के इस 'तांडव' ने न केवल वाहनों की रफ्तार थाम दी, बल्कि आम जनता का सांस लेना भी दूभर कर दिया है।
📊 सुबह 8 बजे का डरावना डेटा: 278 AQI
आज सुबह जब शहर उठा, तो चारों तरफ जहरीली सफेद चादर लिपटी थी। शून्य विजिबिलिटी के कारण हाईवे और मुख्य सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। रॉयल बुलेटिन द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8:00 बजे एक्यूआई 278 के खतरनाक स्तर पर था। यह आंकड़ा पिछले रिकॉर्ड्स (मार्च 2025 में 215) से कहीं ज्यादा है। इस महीने (11 मार्च तक) का औसत एक्यूआई भी 231 रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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प्रदूषण का यह ग्राफ सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही का भी नतीजा है। शहर को 'गैस चैंबर' बनाने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं:
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धूल और निर्माण कार्य: सड़कों पर उड़ती धूल और अनियंत्रित निर्माण?
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टायर जलाना: क्या खुले में टायर और कचरा जलाना जहर घोल रहा है?
✊ 'रॉयल बुलेटिन' की मुहिम: आप बोलेंगे, हम बनेंगे आपकी आवाज!
इस गंभीर संकट पर प्रशासन की चुप्पी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं। रॉयल बुलेटिन अपने पाठकों और मुजफ्फरनगर के जागरूक नागरिकों से अपील करता है कि वे इस 'सांसों के संकट' पर अपनी बेबाक राय रखें।
"ज़िंदा हो तो ज़िंदा नज़र आओ, ग़लत के ख़िलाफ़ करो आवाज़ बुलंद"
इस मुहिम का हिस्सा बनें और बताएं कि आपके क्षेत्र में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण क्या है और इसका क्या समाधान होना चाहिए?
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मुजफ्फरनगर में 'गैस चैंबर' जैसे हालात: मार्च में कोहरे और प्रदूषण का तांडव, AQI 278 पहुंचा, शून्य विजिबिलिटी से थमी रफ्तार
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