उत्तराखंड में फर्जी शंकराचार्यों की जांच की मांग, जानें क्या है 'कालनेमी' विवाद
हरिद्वार। स्वामी महेश्वरांनद ने सीएम धामी को पत्र लिखकर की मांग कि आगामी अर्द्धकुम्भ मेला को देखते हुए राज्य में फैले कालनेमियों की गहनता से जांच की मांग को लेकर सरस्वती आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। सीएम धामी को भेजे पत्र में स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहाकि हिन्दू तीर्थ क्षेत्र आतंकवादियों एवं विधर्मियों के निशाने पर हमेशा से रहा है। उत्तराखण्ड भी कालनेमियों से अछूता नहीं है। यहां फर्जी आधार कार्ड, मार्कशीट, डीएल, रजिस्टरी कोई भी दस्तावेज द्वारा कोई भी पद प्रतिष्ठा फर्जी शंकराचार्य, महामण्डलेश्वर बनना व बनाना राज्य में कानून व्यवस्था लचर होने के कारण यह अपराध गम्भीर नहीं माना जा रहा है। ऐसे फर्जी लोगों का एकमात्र उद्देश्य येन-केन-प्रकारण धन अर्जित करना है, जबकि फर्जी अपराध के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने कहाकि हाल ही में प्रयागराज में कथित स्वयंभू स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द जो स्वयं को शंकराचार्य पद से सुशोभित कहते हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में वाद लम्बित हैं। बावजूद उसके आप अपने आपको प्रचारित कर समाज में यह भ्रम पैदा कर विद्वेश फैलाया जा रहा है। यह स्पष्ट अपराध की श्रेणी में है। स्वामी महेश्वरांनद महाराज ने कहाकि सैंकड़ों, करोड़ हिन्दुओं की सनातन धर्म को मानने वालों की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है, जबकि पूर्व में भी ऐसा कोई भी मौका हिन्दू सनातन धर्मावलम्बियों का मखौल उड़ाने व हतोत्साहित कर जानबूझकर आघात नहीं पहुंचाया।
जब राम मन्दिर के उद्घाटन के समय भी इनके द्वारा पूर्व में घोर विरोध किया गया, साथ ही अब गौमाता, राष्ट्रमाता का नारा वर्तमान में लेकर चलाने का ड्रामा कर रहे हैं, जबकि गाय का दूध पीते तो हैं पर आज तक गौवंश के लिए कोई कार्य नहीं किया, कितना गौ पालन करते हैं, आज तक नहीं सुना गया। कहाकि आगामी वर्ष में उत्तराखण्ड में में दिव्य और भव्य कुम्भ मेला का जो शुभ आयोजन हो रहा है, इसमें किसी प्रकार का खलल व विघटन पैदा न हो सके। प्रयागराज के महाकुम्भ व माघ मेले से सीख लेते हुए ऐसे और कई कालनेमियों को चिन्हित करके उत्तराखण्ड में प्रवेश करने पर रोक लगाकर इनकी सम्पत्ति की सीबीआई से जांच करायी जाए तथा इनके सनातन विरोधी वक्ताओं की भी जांच करायी जाये, जिससे देश में अशान्ति, अस्थिरता का माहौल न बन सके तथा तीर्थ का तीर्थत्व बना रहे। उन्होंने सीएम धामी से कालनेमियों, कथित शंकराचार्यो की जांच सीबीआई से कराए जाने और इनके खिलाफ सगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
कालनेमी शब्द का उपयोग: रामायण काल के 'कालनेमी' राक्षस (जिसने साधु का भेष धारण कर हनुमान जी को छलने की कोशिश की थी) के संदर्भ में उन लोगों पर निशाना साधा जा रहा है जो भगवा वस्त्र पहनकर जमीन हड़पने, धोखाधड़ी या राजनीतिक लाभ लेने में जुटे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
