देवताओं की होली क्यों कहलाती है रंग पंचमी, जानें इस पवित्र पर्व से जुड़ी खास मान्यता
ली का रंगीन त्योहार खत्म होते ही कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि रंग पंचमी कब मनाई जाएगी। दरअसल होली के बाद भी रंगों का उत्सव पूरी तरह समाप्त नहीं होता। पांच दिन बाद आने वाली रंग पंचमी को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन राधा कृष्ण की पूजा की जाती है और रंगों के साथ खुशी का उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और लोग खुशियों के साथ इस पर्व को मनाते हैं।
रंग पंचमी 2026 कब मनाई जाएगी
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 07 मार्च 2026 की शाम 7 बजकर 17 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 08 मार्च 2026 की रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि को मानते हुए रंग पंचमी का पर्व 08 मार्च 2026 रविवार को मनाया जाएगा।
इस दिन देश के कई हिस्सों में खास उत्साह देखने को मिलता है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और ब्रज क्षेत्र में लोग गुलाल और अबीर के साथ रंगों का उत्सव मनाते हैं। कई स्थानों पर यह पर्व बड़े धार्मिक उत्सव की तरह मनाया जाता है।
क्यों कहा जाता है देवताओं की होली
धार्मिक मान्यता के अनुसार रंग पंचमी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन राधा रानी के साथ रंगों की होली खेली थी।
कहा जाता है कि उस दिव्य दृश्य को देखकर देवी देवताओं ने उन पर पुष्प वर्षा की थी। इसी कारण इस दिन को देवताओं की होली भी कहा जाता है। इसलिए कई स्थानों पर रंग पंचमी को विशेष पूजा और उत्सव के साथ मनाया जाता है।
रंग पंचमी का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रंग पंचमी का दिन बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन देव लोक के देवता पृथ्वी पर आते हैं और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार पंचमी तिथि और चंद्रमा की स्थिति मन को शांति और आनंद देने वाली मानी जाती है। इसलिए कई लोग इस दिन नए कार्य की शुरुआत करते हैं या शुभ संकल्प लेते हैं।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रंगों का भी ग्रहों से गहरा संबंध होता है। लाल रंग ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा हुआ है जबकि गुलाबी रंग प्रेम और सौहार्द का संकेत देता है। रंग पंचमी पर इन रंगों से खेलना जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
रंग पंचमी पर कैसे मनाया जाता है उत्सव
रंग पंचमी के दिन लोग सुबह स्नान करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा करते हैं। मंदिरों में विशेष आरती और भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
कई स्थानों पर लोग फूलों और प्राकृतिक रंगों से होली खेलते हैं। ब्रज क्षेत्र में यह उत्सव किसी बड़े मेले जैसा दिखाई देता है। मंदिरों में अबीर गुलाल उड़ाया जाता है और भक्त राधा कृष्ण के नाम का कीर्तन करते हैं।
कुछ लोग इस दिन दान पुण्य भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को वस्त्र अनाज या मिठाई का दान करना शुभ फल देने वाला माना जाता है।
रंग पंचमी का सांस्कृतिक संदेश
रंग पंचमी केवल रंग खेलने का पर्व नहीं है बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और खुशियों का संदेश भी देता है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन में प्रेम अपनापन और खुशियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी जब लोग एक दूसरे को रंग लगाकर मुस्कुराते हैं तो यह भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को जीवित रखता है। यही कारण है कि यह पर्व सदियों से लोगों के जीवन में उत्साह और सकारात्मकता का संदेश देता आ रहा है
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