मार्च की संकष्टी चतुर्थी कब है, जानें 6 या 7 मार्च सही तारीख क्या है, चांद निकलने का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है और भक्त अपने जीवन के कष्ट दूर होने की कामना करते हैं। चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस बार यह पावन व्रत मार्च के महीने में पड़ रहा है इसलिए कई लोग यह जानना चाहते हैं कि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 6 मार्च को है या 7 मार्च को।
इस दिन व्रत रखने वाले लोग भगवान गणेश की पूजा करते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और हर कार्य में सफलता मिलती है।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि
धार्मिक पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 मार्च को शाम 5 बजकर 53 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगी।
उदयातिथि के अनुसार चतुर्थी तिथि 7 मार्च को मानी जाएगी लेकिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च को रखा जाएगा। इसका मुख्य कारण चंद्रमा का समय है।
6 मार्च को चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में हो रहा है जबकि 7 मार्च को चंद्रमा पंचमी तिथि में निकलेगा। चतुर्थी व्रत में चतुर्थी के चंद्रमा को अर्घ्य देना आवश्यक माना जाता है इसलिए भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च को रखना ही शुभ माना गया है।
गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त
यदि आप 6 मार्च को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं तो भगवान गणेश की पूजा सुबह 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 11 बजकर 5 मिनट तक की जा सकती है।
इस दिन सुबह 7 बजकर 6 मिनट से वृद्धि योग भी प्रारंभ होगा। इस योग में किए गए शुभ कार्यों के फल में वृद्धि होती है और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 3 मिनट से 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा जिसे दिन का अत्यंत शुभ समय माना जाता है।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा निकलने का समय
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का बहुत विशेष महत्व होता है। भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलते हैं।
इस बार भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा रात 9 बजकर 14 मिनट पर निकलेगा। चंद्रमा के दर्शन के बाद भगवान गणेश की पूजा कर अर्घ्य अर्पित किया जाता है और फिर व्रत का पारण किया जाता है।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ होता है संकटों को दूर करने वाली चतुर्थी। इस दिन भगवान गणेश के भालचंद्र स्वरूप की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम के साथ इस व्रत को करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान गणेश की कृपा से बाधाएं समाप्त होती हैं और जीवन में सुख शांति और सफलता प्राप्त होती है। इसी कारण देशभर में बड़ी संख्या में भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और गणेश जी की पूजा कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित जानकारी के अनुसार तैयार किया गया है। अलग अलग स्थानों पर तिथि और चंद्रमा निकलने का समय थोड़ा अलग हो सकता है। सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या धार्मिक विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां