माता के समान कोई गुरु नहीं: सत्य, तप और मोक्ष की अनमोल शिक्षाएँ
जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की महत्ता को लेकर प्राचीन ग्रंथों में दिए गए निर्देश आज भी प्रासंगिक हैं। प्राचीन शिक्षाओं के अनुसार माता और गुरु का स्थान सर्वोपरि है, शांति और सत्य में ही व्यक्ति का जीवन मार्गदर्शित होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन में विद्या, परिवार और सामाजिक कर्तव्यों का पालन करना सर्वोपरि है। दीन-हीन और अभावग्रस्तों की सेवा करना सबसे बड़ी पूजा के समान है, जबकि अहंकार और कृतघ्नता व्यक्ति को पतन की ओर ले जाती हैं।
आधुनिक जीवन में भी इन शिक्षाओं का महत्व कम नहीं हुआ है। परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों को अपनाने से ही व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है और समाज में शांति और सद्भाव स्थापित कर सकता है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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