रक्त शुद्धि से लेकर हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है कालमेघ, सेवन से पहले जान लें सावधानियां
नई दिल्ली। आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है, जो अपने गुणों के अनुसार बीमारियों से निजात पाने में मदद करती हैं। किसी जड़ी-बूटी की जड़ तो किसी के पत्ते गुणों से भरे होते हैं। ऐसा ही एक पत्तेदार पौधा कालमेघ है, जिसकी पत्तियां शरीर के हर अंग के लिए फायदेमंद हैं।
ऐसे में मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली और त्वचा संक्रमण जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। इनसे बचाव के लिए कालमेघ के पत्तों का पेस्ट बनाकर लगाने से राहत मिलती है। कालमेघ एंटी-क्लॉटिंग गुण से भरपूर होता है, जो धमनियों के जरिए रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है। यह रक्त में बनने वाले धक्कों के जोखिम को भी कम करता है। कालमेघ लंबे समय तक रहने वाले या बार-बार होने वाले बुखार में उपयोगी माना जाता है। यह मलेरिया, टायफाइड और वायरल फीवर में शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है। अब सवाल है कि किन लोगों को कालमेघ के सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए। अगर कालमेघ के सेवन के बाद पेट में दर्द, चक्कर आना और उल्टी जैसी परेशानी होती है तो सेवन न करें। गर्भवती महिलाएं भी सेवन से बचें।
