बिना शरीर को जाने कर रहे हैं त्रिफला का सेवन, वात प्रवृत्ति वाले जान लें नुकसान
नई दिल्ली। आयुर्वेद में 'त्रिफला' को शरीर के लिए अमृत माना गया है। पेट से जुड़ी परेशानियों से लेकर आंखों तक के लिए त्रिफला का सेवन करने की सलाह दी जाती है, और बाजार में इसका चूर्ण आसानी से मिल जाता है। त्रिफला में आंवला, बहेड़ा, और हरड़ का मिश्रण होता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, लेकिन आज के समय में खराब जीवनशैली की वजह से हर कोई बिना जाने और समझे त्रिफला का सेवन कर रहा है।
आयुर्वेद के मुताबिक त्रिदोष के कारण हर शरीर अलग होता है। अगर शरीर में वात की अधिकता है, तब त्रिफला का सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। त्रिफला के सेवन से पहले अपने शरीर की प्रवृत्ति को पहचानना और सेवन की सही विधि जानना बहुत जरूरी है। पहले जानते हैं कि वात प्रकृति और 'त्रिफला' का प्रभाव कैसा होता है। वात प्रकृति वालों का शरीर में रूखापन और शीत दोनों ही अधिक पाई जाती है। ऐसे लोगों के त्वचा ड्राई, पाचन कमजोर और जोड़ों में दर्द की समस्या अक्सर बनी रहती है। वहीं त्रिफला का स्वभाव भी रुखापन पैदा करने वाला होता है। अगर इसे साधे पानी के साथ लिया जाए तो यह शरीर में रुखापन बड़ा सकता है और इससे पाचन भी कमजोर होगा। ऐसे में वात प्रवृत्ति के लोगों को त्रिफला अपने शरीर के गुणों के अनुसार लेनी चाहिए। आयुर्वेद में माना गया है कि वात प्रवृत्ति के लोगों को त्रिफला को घी और गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए।
घी से रुखापन कम होगा और आंतों में कब्ज की समस्या भी नहीं रहेगी। वहीं गुनगुना पानी मल को बाहर निकालने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा, त्रिफला का सेवन अरंडी के तेल के साथ भी किया जा सकता है। इसके लिए गुनगुने पानी में अरंडी और त्रिफला को मिलाकर लें। इससे आंतों में गतिशीलता बढ़ेगी और वात का शमन होगा। त्रिफला चूर्ण की बजाय 'त्रिफला घृत' का सेवन भी वात प्रवृत्ति वालों के लिए लाभकारी रहेगा क्योंकि इसमें पहले से ही घी और अन्य औषधियां मिली हैं। अब जानते हैं कि कब त्रिफला का सेवन करना लाभकारी होता है।आयुर्वेद में माना गया है कि वात दोष शाम और रात के समय अधिक सक्रिय होता है, इसलिए त्रिफला का सेवन रात को सोते समय करना सबसे प्रभावी रहता है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

टिप्पणियां