क्या योगासन केवल उम्रदराज और बीमार लोगों के लिए है? आयुष मंत्रालय से जानें मिथक और तथ्य
नई दिल्ली। योग एक प्राचीन भारतीय परंपरा है, जो न केवल शरीर बल्कि मन के लिए भी बेहद जरूरी है। योगासन मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, लेकिन योग को लेकर कई तरह की गलतफहमियां या मिथक फैले हुए हैं, जो लोगों को इससे दूर रखते हैं।
ऐसे में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ऐसे मिथकों को दूर करने के लिए तथ्यों के साथ जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, एक प्रमुख मिथक यह है कि योग सिर्फ बुजुर्ग लोगों या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए है, लेकिन तथ्य यह है कि योग सिर्फ बुजुर्गों या स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों के लिए नहीं है। यह एक सार्वभौमिक और बहुमुखी अभ्यास है जो सभी उम्र के लोगों और हर फिटनेस स्तर के व्यक्तियों के लिए फायदेमंद है। बच्चे, युवा, मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्ग – सभी योग से लाभ उठा सकते हैं। योग किसी धर्म या उम्र से बंधा नहीं है। यह एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है। योग के लिए यह भी धारणा है कि इसके लिए बहुत लचीला होना जरूरी है। तथ्य यह है कि नियमित अभ्यास से लचीलापन खुद बढ़ता है। योग को लेकर ये भी एक गलत धारणा है कि योग महिलाओं या धीमे व्यायाम पसंद करने वालों के लिए है, लेकिन ऐसा नहीं है, पुरुष, एथलीट और सभी योग से फिटनेस बढ़ा सकते हैं।
एक्सपर्ट के अनुसार, योग का अभ्यास शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के संचार को बेहतर बनाता है, इंद्रियों को नियंत्रित करता है और मन-आत्मा में शांति लाता है। यह तनाव, चिंता, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटिज जैसी समस्याओं की रोकथाम और प्रबंधन में भी उपयोगी है। योग के आठ अंग – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि है, जो जीवन के हर पहलू को संतुलित करने में कारगर हैं। योग को लेकर अन्य आम मिथक भी हैं, जैसे- योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम या स्ट्रेचिंग है– जबकि यह मन और आत्मा का भी अभ्यास है। दिनचर्या में योगासन को शामिल करने से तन को लचीलापन, ताकत, संतुलन तो मन को तनाव कम करने, बेहतर नींद और शांति में मदद करता है। यह किसी भी उम्र में शुरू किया जा सकता है और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया जा सकता है।
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