रैंसमवेयर समूह हाइव के ऑपरेशन पर अमेरिका ने लगाया ताला, 100 मीलियन डॉलर से अधिक की कर चुका था वसूली
वाशिंगटन,। कंम्प्यूटरों में घुसपैठ कर उनको निष्क्रिय करने के बाद ठीक करने के लिए क्रिप्टो करेंसी में वसूली करने वाले रैंसमवेयर के हाइव ऑपरेशन को बंद कर दिया है। रैंसमवेयर के हाइव ऑपरेशन को अमेरिका के न्याय विभाग ने गुरुवार को बंद करने की घोषणा की है। रैंसमवेयर हाइव ने दुनिया भर में 1500 से […]
वाशिंगटन,। कंम्प्यूटरों में घुसपैठ कर उनको निष्क्रिय करने के बाद ठीक करने के लिए क्रिप्टो करेंसी में वसूली करने वाले रैंसमवेयर के हाइव ऑपरेशन को बंद कर दिया है। रैंसमवेयर के हाइव ऑपरेशन को अमेरिका के न्याय विभाग ने गुरुवार को बंद करने की घोषणा की है। रैंसमवेयर हाइव ने दुनिया भर में 1500 से अधिक पीड़ितों से 100 मीलियन डॉलर से अधिक की वसूली की थी। यह कारनामा अमेरिका, जर्मनी और नीदरलैंड के संयुक्त प्रयास से संभव हुआ, जिसके तहत हैकर के सिस्टम में घुस कर उसे हैक कर लिया गया।
यूएस अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलैंड ने कहा कि जर्मन और नीदरलैंड कानून प्रवर्तन के साथ काम करने वाले अमेरिकी अधिकारियों ने हाइव की वेबसाइट और सर्वर पर लगभग सात महीने तक घुसपैठ करने के बाद इसे अपने कब्जे में ले लिया।
ये भी पढ़ें इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलर करिस घुसपैठ ने सैकड़ों कंपनियों को हाइव हैक करने और उनके डेटा सिस्टम को फ्रीज करने के बाद की गई जबरन वसूली की मांग में 130 मिलियन डॉलर का भुगतान करने से बचने में मदद की।
डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा मोनाको ने हाइव में घुसपैठ करने के ऑपरेशन को 21 वीं सदी की सबसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि हमने हैकर्स को हैक किया है।
हाइव एक रैंसमवेयर सेवा के रूप में संचालित होता है, जिसका मतलब है कोई भी सॉफ़्टवेयर और अन्य सेवाओं को किराए पर ले सकता है ताकि निर्धारित लक्ष्य वाले आईटी सिस्टम को हैक करने और लॉक करने में मदद मिल सके और भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा सके। जिससे हाइव ग्राहक से जबरन वसूली से होने वाले लाभ को बांट सकेगा।
पहली बार 2021 में रैंसमवेयर सामने आया था, जिसने करीब 1,500 से अधिक कंपनियों और संस्थानों को हैक कर उनके आईटी सिस्टम या डेटाबेस को हाइव द्वारा एन्क्रिप्ट किया गया और बैकअप को हटाकर मुश्किलें पैदा की। हैक किए सिस्टम को ठीक करने और और वायरस हटाने के बदले में हैकर्स बड़े भुगतान की मांग करते और वो भी क्रिप्टोकरेंसी में।
अगर पीड़ितों ने भुगतान करने से इनकार कर दिया, तो हाइव गोपनीय आंतरिक फाइलों और दस्तावेजों को इंटरनेट पर प्रकाशित करने की धमकी देते थे।
साइबर सुरक्षा सलाहकारों के अनुसार पीड़ितों में भारत की टाटा पावर, जर्मन रिटेल दिग्गज मीडिया मार्कट, कोस्टा रिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, इंडोनेशिया की राज्य गैस कंपनी और कई अमेरिकी अस्पताल समूह शामिल हैं।
डार्क वेब पर हाइव की वेबसाइट को फ्रीज कर दिया गया था, अंग्रेजी और रूसी में बारी-बारी से स्क्रीन पर लिखा था कि अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने अपने कब्जे में ले लिया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि हाइव की डार्क-वेब साइट में घुसपैठ कर जानकारी एकत्र की गई, न्याय अधिकारी पीड़ित के जमे हुए डेटा को अनलॉक करने के लिए आवश्यक डिजिटल कुंजी (की) प्राप्त किया ताकि उन्हें हाइव का भुगतान करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
उदाहरण के तौर पर टेक्सास के एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट, लुइसियाना के अस्पताल और एक अनाम खाद्य सेवा कंपनी को हाइव हमले की चपेट में आने के बाद फिरौती में लाखों डॉलर देने से रोकने में मदद मिली।
मोनाको ने कहा कि महीनों तक हमने पीड़ितों को उनके साइबर हमले से बचाने और हमलावरों को बेअसर करने के साथ ही हाइव नेटवर्क को जबरन वसूली से वंचित रखा।
अमेरिकी अधिकारी ने इस बारे में फिलहाल यह नहीं बताया कि हाइव के पीछे कौन है या इस संबंध में किसी की गिरफ्तारी हुई या नहीं। इसके साथ बताया कि जांच अभी जारी है।
जांच में यूएस एफबीआई, जर्मन रूटलिंगेन पुलिस मुख्यालय, जर्मन फेडरल क्रिमिनल पुलिस, नीदरलैंड नेशनल हाई टेक क्राइम यूनिट और यूरोपोल शामिल थे।
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