रोज 15-20 करें योग की वायु मुद्रा, पेट में गैस और जोड़ों के दर्द से मिलेगी निजात
नई दिल्ली। आज मोबाइल और लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताने, गलत खानपान और भागदौड़ भरी दिनचर्या ने हमारे शरीर को अंदर से थका दिया है। इस दौरान लोग अक्सर पेट की समस्या, गैस, कब्ज, बेचैनी, घबराहट, जोड़ों के दर्द या नींद न आने जैसी परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये संकेत होते हैं कि शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। आयुर्वेद के मुताबिक जब शरीर के भीतर ऊर्जा का प्रवाह रुकता है, तभी बीमारी जन्म लेती है।
इसी वायु तत्व को शांत और संतुलित करने के लिए योग में एक विशेष मुद्रा बताई गई है, जिसे वायु मुद्रा कहा जाता है। यह मुद्रा दिखने में बेहद सरल है, लेकिन इसका असर शरीर के भीतर गहराई तक जाता है। आयुर्वेद मानता है कि अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और तर्जनी उंगली वायु तत्व का। जब हम तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के नीचे दबाते हैं, तो अग्नि तत्व वायु पर नियंत्रण करता है। वायु मुद्रा करने का तरीका बहुत आसान है। किसी शांत जगह पर बैठ जाएं। रीढ़ सीधी रखें और आंखें बंद कर लें। अब तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के मूल में दबाएं और बाकी तीन उंगलियां सीधी रखें। सांस सामान्य रखें। इस मुद्रा में बैठते ही शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगता है। रोज कम से कम 15 से 20 मिनट तक इसका अभ्यास करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
सुबह खाली पेट शांत मन से किया गया अभ्यास ज्यादा प्रभावी माना जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे कुर्सी पर बैठकर या चलते-फिरते भी किया जा सकता है। वायु मुद्रा का असर शरीर के तंत्रिका तंत्र पर सबसे पहले दिखाई देता है। यह मुद्रा नर्व्स की काम करती है, जिससे बेचैनी, घबराहट और तनाव धीरे-धीरे घटने लगते हैं। जब दिमाग शांत होता है, तो शरीर के अंग भी बेहतर ढंग से काम करने लगते हैं। पाचन तंत्र पर इसका सीधा असर पड़ता है। गैस, सूजन और अपच जैसी समस्याएं इसलिए होती हैं क्योंकि आंतों में वायु फंस जाती है। वायु मुद्रा इस फंसी हुई ऊर्जा को निकलने में मदद करती है, जिससे पेट हल्का महसूस होता है। इस मुद्रा से रक्त संचार भी बेहतर होता है। जब ब्लड फ्लो सुधरता है तो जोड़ों और मांसपेशियों तक पोषण पहुंचता है। यही वजह है कि जोड़ों के दर्द, साइटिका और मांसपेशियों की जकड़न में भी यह मुद्रा सहायक मानी जाती है।
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लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
