फास्टैग और अमेज़न गिफ्ट कार्ड के जरिए करते थे धोखाधड़ी..दो आरोपित गिरफ्तार..जानें कैसे बचें इस स्कैम से
नई दिल्ली। पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस टीम ने फास्टैग और अमेज़नगिफ्ट कार्ड के जरिए धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपितों को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपितों के पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त दराड़े शरद भास्कर ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस को एक शिकायत मिली थी। जिसमें पीड़ित ने बताया कि उसके व्हाट्सऐप पर ई-चालान का संदेश आया था, जिसमें एक एपीके फाइल संलग्न थी। फाइल खोलते ही मोबाइल फोन हैक हो गया और क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये से अधिक की राशि धोखाधड़ी से कट गई।
इसके बाद इंस्पेक्टर विकास कुमार के नेतृत्व में एसआई सुनील कुमार, एएसआई संदीप पूनिया और कांस्टेबल करमबीर की टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने घड़साना में छापेमारी की। वहां “बंसारी कंपनी” नाम से संचालित एक फर्म मिली, जहां से पूरी तरह सुसज्जित साइबर ठगी का सेटअप बरामद हुआ। इस दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। जिनकी पहचान घनश्याम उर्फ जीबी बॉस उर्फ सोनू (29) और नरेश कुमार उर्फ कालू (27) के रूप में हुई। कम मुनाफे से अपराध की राह पूछताछ में मुख्य आरोपित घनश्याम ने बताया कि उसने “बंसारी ब्रदर्स एंड वेंचर्स” के नाम से फर्म खोलकर ई-मित्र सेवाओं के जरिए बिजली बिल आदि के भुगतान का काम शुरू किया था।
कम मुनाफा होने पर उसने अपने बैंक खातों का दुरुपयोग कर साइबर ठगी की रकम को फास्टैग के माध्यम से घुमाकर अमेज़नगिफ्ट कार्ड में बदलने की साजिश रची। पुलिस ने आरोपितों के पास से 10 लैपटॉप, 70 मोबाइल फोन, 37 एटीएम कार्ड, 10 बैंक पासबुक, 467 सिम कार्ड, पांच फास्टैग और एक पीओएस मशीन बरामद की है। इतनी बड़ी मात्रा में उपकरणों की बरामदगी से यह साफ है कि गिरोह कई राज्यों में संगठित रूप से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। पुलिस रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जुड़े कई (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर दर्ज शिकायतें देश के विभिन्न राज्यों से संबंधित हैं, जो उनके संगठित और बड़े स्तर पर साइबर अपराध में शामिल होने की पुष्टि करती हैं। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
अपनी बैंकिंग डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें!
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कॉल पर भरोसा न करें: फास्टैग अपडेट करने के लिए कोई भी बैंक या कंपनी फोन पर ओटीपी (OTP) नहीं मांगती।
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गिफ्ट कार्ड की मांग: अगर कोई अनजान व्यक्ति किसी भुगतान के बदले गिफ्ट कार्ड की मांग करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं; यह ठगी का सबसे आम तरीका है।
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आधिकारिक ऐप: हमेशा फास्टैग वॉलेट को उसके आधिकारिक ऐप या बैंक की वेबसाइट से ही रिचार्ज करें।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
