मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव विनय पाल ने पूर्व सांसद मलूक नागर द्वारा सहारनपुर में आयोजित रालोद की सभा में सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल को लेकर की गई कथित अभद्र एवं अपमानजनक टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के प्रति इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करना न केवल राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि इससे पाल और धनगर समाज की भावनाएं भी आहत हुई हैं। विनय पाल ने जारी प्रेस बयान में आरोप लगाया कि सहारनपुर की रालोद सभा में अपने संबोधन के दौरान मलूक नागर ने सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के प्रति ‘दो कौड़ी का’ और ‘नौसिखिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच से किसी वरिष्ठ राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग उचित नहीं है।
‘मलूक नागर की सोच और मानसिकता को दर्शाता है बयान’
सपा प्रदेश सचिव विनय पाल ने कहा कि मलूक नागर का कथित बयान उनकी सनकी और दिवालिया सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के प्रति की गई टिप्पणी केवल एक राजनीतिक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि पाल समाज और धनगर समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।उन्होंने कहा कि श्यामलाल पाल समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और प्रदेश स्तर पर पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनके प्रति सार्वजनिक मंच से की गई अपमानजनक टिप्पणी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पाल-धनगर समाज के प्रति नफरत का लगाया आरोप
विनय पाल ने मलूक नागर पर पाल एवं धनगर समाज के प्रति कथित तौर पर नफरत भरी मानसिकता रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछड़े और अति पिछड़े समाज के लोगों ने लंबे संघर्ष के बाद राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसे में किसी समाज के प्रतिनिधि के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग सामाजिक रूप से भी गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि पाल समाज अपने सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
रालोद नेताओं की मौजूदगी पर भी उठाए सवाल
सपा प्रदेश सचिव ने अपने बयान में रालोद के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और कथित टिप्पणी पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की सभा में रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के सामने यदि इस प्रकार की टिप्पणी की गई और उसे रोकने या विरोध करने के बजाय उसे सुना गया, तो यह भी चिंताजनक है। विनय पाल ने कहा कि रालोद नेतृत्व को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंच से किसी समाज से जुड़े वरिष्ठ राजनीतिक प्रतिनिधि के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल होता है तो पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसी भाषा का विरोध करे।
‘रालोद को अपनी सोच स्पष्ट करनी चाहिए’
विनय पाल ने कहा कि रालोद लंबे समय से किसानों, पिछड़ों और अति पिछड़ों की राजनीति करने का दावा करता रहा है। ऐसे में पार्टी के मंच से किसी पिछड़े समाज से जुड़े नेता के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने रालोद नेतृत्व से मांग की कि वह इस पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट करे और बताए कि क्या वह मलूक नागर के कथित बयान से सहमत है या नहीं।
माफी की मांग, बोले-अपमान सहन नहीं करेगा पाल समाज
विनय पाल ने पूर्व सांसद मलूक नागर और रालोद नेतृत्व से तत्काल माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाल समाज इस कथित अपमान को चुपचाप सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच एक मर्यादा होनी चाहिए और सार्वजनिक मंच पर उसका पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्यामलाल पाल का सम्मान केवल एक राजनीतिक पद का सम्मान नहीं है, बल्कि उनके सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े लोगों की भावनाओं का भी विषय है। इसलिए मलूक नागर को अपने कथित बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए माफी मांगनी चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ सकता है विवाद
मलूक नागर के सहारनपुर सभा में दिए गए कथित बयान को लेकर सपा नेता की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। एक ओर सपा ने इसे पाल और धनगर समाज के सम्मान से जोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर इस मामले में रालोद नेतृत्व और मलूक नागर की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।
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