अवैध कोयला खदान हादसे में बढ़ा मौत का आंकड़ा, 27 लोगों की जा चुकी जान
इसके अलावा, जहरीली गैस, लगातार धंसी हुई जमीन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव कार्य मुश्किल हो गया है। 27 मौतों और 9 गंभीर रूप से घायल लोगों के साथ यह हादसा हाल के वर्षों में सबसे घातक खदान दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है। बचाव और राहत कार्यों के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की 2 टीमें, एक विशेष बचाव टीम और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की 3 टीमें तैनात की गई हैं। सभी टीमें कड़ी समन्वय में काम कर रही हैं। जोवाई और शिलॉन्ग से अतिरिक्त मेडिकल टीम भेजी गई है। जोवाई से 7 एम्बुलेंस तैनात किए गए हैं। सीमा सुरक्षा बल ने भी साइट पर अपनी टीम तैनात की है, जिसमें 1 डिप्टी कमांडेंट, 15 कर्मी, 2 एम्बुलेंस, 2 डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं। आवश्यक होने पर सेना और वायुसेना भी सहायता के लिए तैयार है। इस मामले में पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे उस अवैध कोयला खदान के मालिक हैं। गिरफ्तारियों की पुष्टि करते हुए पूर्वी जैंटिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा कि बुधवार की सुबह थांग्सको इलाके में हुए विस्फोट के सिलसिले में आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
हालांकि, पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान बताने से इनकार किया और कहा कि अदालत में पेश किए जाने के बाद ही विवरण सार्वजनिक किया जाएगा। मेघालय में अवैध कोयला खदानों के निरंतर संचालन पर कड़ा रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय ने पूर्वी जैंतिया हिल्स जिले में एक कथित अवैध खनन स्थल पर हुए घातक विस्फोट के संबंध में तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया। न्यायमूर्ति एचएस थांगखिव और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की खंडपीठ ने थांग्सको क्षेत्र में हुए विस्फोट से संबंधित मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि इस वर्ष 14 जनवरी को हुई एक घातक घटना के बावजूद जिले में अवैध कोयला खनन गतिविधियां जारी रहीं, जो खनन प्रतिबंध और अदालत के निर्देशों के लगातार उल्लंघन का संकेत देती हैं। पीठ ने जिला प्रशासन और पुलिस को बिना देरी किए कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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