इसरो ने किया एसएसएलवी-डी2 का सफल प्रक्षेपण, सभी तीन उपग्रह कक्षा में स्थापित
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी-डी2) की दूसरी विकासात्मक उड़ान के जरिये शुक्रवार को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस-7) और दो अन्य उपग्रहों का यहां शार रेंज से प्रक्षेपण किया और उन सभी को निर्धारित समय पर वांछित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। इससे पहले तड़के […]
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी-डी2) की दूसरी विकासात्मक उड़ान के जरिये शुक्रवार को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस-7) और दो अन्य उपग्रहों का यहां शार रेंज से प्रक्षेपण किया और उन सभी को निर्धारित समय पर वांछित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।
इससे पहले तड़के 02:48 बजे शुरू हुई साढ़े छह घंटे की उलटी गिनती के बाद
ये भी पढ़ें जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चासुबह 09:18 बजे साफ मौसम के बीच एसएसएलवी-डी2 ने पहले लॉन्च पैड से शानदार उड़ान भरी। उड़ान के 15 मिनट पूरे होने और तीनों चरणों के अलग होने के बाद 119 टन वजनी 34 मीटर लंबे एसएसएलवी ने 156.3 किलोग्राम वजनी ईओएस-07, अमेरिकी कंपनी अंटारिस द्वारा निर्मित 10.2 किलोग्राम के जानूस-1 उपग्रह और चेन्नई के स्पेसकिड्ज इंडिया द्वारा निर्मित 8.8 किलोग्राम के आज़ादीसैट-2 उपग्रह को 450 किलोमीटर लंबी कक्षा में 37.2 डिग्री के झुकाव पर स्थापित किया।
इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने मिशन कंट्रोल सेंटर, इसरो के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि मिशन पूरा हुआ। उन्होंने कहा, “एसएसएलवी-डी2 मिशन सफल रहा और तीनों उपग्रह सटीक कक्षा में स्थापित कर दिये गये हैं।” उन्होंने मिशन की सफलता के लिए इसरो की पूरी टीम को धन्यवाद भी दिया।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां