यूजीसी के विरोध में संतों की पदयात्रा मेरठ पहुँची: गृहयुद्ध की दी चेतावनी
मेरठ। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'यूजीसी' कानून के विरोध में संतों की पदयात्रा अपने चौथे दिन मेरठ के दौराला क्षेत्र में पहुँची। महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी के शिष्य महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी के नेतृत्व में चल रही यह पदयात्रा हरिद्वार के सर्वानंद घाट से 1 मार्च को शुरू हुई थी। पदयात्रियों ने इस कानून को सनातन धर्म के लिए घातक बताते हुए सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है।
सनातन धर्म के लिए 'डेथ वारंट' का आरोप
दौराला पहुँचने पर मीडिया से बात करते हुए महंत यति रामस्वरूपानंद ने आरोप लगाया कि 'यूजीसी' कानून वास्तव में सनातन धर्म के लिए एक "डेथ वारंट" की तरह है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो देश में गृहयुद्ध जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने भारत की तुलना पड़ोसी देशों (बांग्लादेश और पाकिस्तान) की वर्तमान स्थिति से करते हुए कहा कि यह कानून 'गजवा-ए-हिंद' की राह को आसान बनाने की एक गहरी साजिश का हिस्सा है।
हिंदू संगठनों ने बताया 'काला कानून'
पदयात्रा के समर्थन में उतरे अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के पदाधिकारियों ने भी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही और क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र मलिक ने संयुक्त बयान जारी करते हुए इसे "काला कानून" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए हिंदू समाज को जातियों और वर्गों में बांटने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
8 मार्च को दिल्ली कूच की तैयारी
हरिद्वार से पैदल चलकर मेरठ पहुँचे संतों और समर्थकों का जत्था अब दिल्ली की ओर प्रस्थान कर रहा है। आयोजकों के अनुसार:
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यह यात्रा 8 मार्च को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान पहुँचेगी।
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वहां देश भर से आए हिंदू संगठनों और संतों के साथ मिलकर एक विशाल आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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मांग पूरी न होने तक आंदोलन को और भी उग्र रूप देने की योजना है।
प्रशासन की पैनी नजर
पदयात्रा के मेरठ पहुँचने और संतों द्वारा दी गई कड़क चेतावनियों के बाद स्थानीय प्रशासन और खुफिया विभाग अलर्ट पर है। दौराला से लेकर दिल्ली रोड तक पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे। पुलिस अधिकारी यात्रा के मार्ग और उसमें शामिल लोगों की संख्या पर लगातार नजर रख रहे हैं।
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