मेरठ की सेंट्रल मार्केट में पसरा सन्नाटा: व्यापारियों ने दुकानों पर लगाए 'बिकाऊ' के पोस्टर, आरटीआई कार्यकर्ता के खिलाफ खोला मोर्चा
मेरठ। मेरठ की शान कही जाने वाली सेंट्रल मार्केट में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद कभी रोशनी और भीड़ से गुलजार रहने वाले इस बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। प्रशासन की सख्ती और दुकानों के टूटने के डर से व्यापारियों में इस कदर हड़कंप है कि अब कई दुकानों के बाहर "बिकाऊ है" के पोस्टर और बैनर लटकते नजर आ रहे हैं।
खुद ही अतिक्रमण हटाने में जुटे व्यापारी
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बचने और नुकसान को कम करने के लिए व्यापारियों ने अब स्वयं ही अपनी दुकानों के अवैध हिस्सों को हटाना शुरू कर दिया है। छज्जे तोड़े जा रहे हैं और दुकानों के आगे बढ़ाए गए हिस्सों को ध्वस्त किया जा रहा है। कई कारोबारियों ने अपने आवासों में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लगाए गए शटर हटाकर दोबारा दरवाजे लगवाने शुरू कर दिए हैं, ताकि भवनों को उनके मूल स्वरूप में दिखाया जा सके। आलम यह है कि शोरूमों से कीमती साइन बोर्ड और लाइटें हटाई जा रही हैं और टीन शेड जैसी निर्माण सामग्री को बिक्री के लिए बाहर रख दिया गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता के खिलाफ थानों में प्रदर्शन
प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित व्यापारियों का गुस्सा अब आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना पर फूट पड़ा है। व्यापारियों ने शहर के तीन अलग-अलग थानों में प्रदर्शन कर उनके खिलाफ तहरीर दी है और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। व्यापारियों का आरोप है कि खुराना द्वारा की गई लगातार शिकायतों के कारण ही यह संकट खड़ा हुआ है और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर तलवार लटक गई है।
राष्ट्रपति और मुख्य सचिव से राहत की गुहार
अपनी आजीविका बचाने के लिए व्यापारी अब अंतिम प्रयास के रूप में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रदेश के मुख्य सचिव और राष्ट्रपति तक गुहार लगाने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि बाजार पूरी तरह उजाड़ दिया गया, तो इससे न केवल हजारों लोग बेरोजगार होंगे, बल्कि शहर की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ेगा।
कभी शाम के वक्त जिस बाजार में पैदल चलना भी मुश्किल होता था, वहां अब पसरा सन्नाटा शहरवासियों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि व्यापारियों की यह गुहार शासन-प्रशासन के रुख में कोई बदलाव ला पाती है या ध्वस्तीकरण का पीला पंजा बाजार की सूरत पूरी तरह बदल देगा।
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