मध्यप्रदेश में गेहूं 2700 रुपये तक पहुंचने की संभावना बोनस बढ़ाने पर टिकी किसानों की नजर
मध्यप्रदेश में रबी सीजन की गेहूं खरीदी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं लेकिन किसानों के बीच संतोष के बजाय नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 25 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। यह पिछले साल से अधिक जरूर है लेकिन राज्य सरकार की ओर से मिलने वाले बोनस में भारी कमी ने किसानों को परेशान कर दिया है।
पिछले वर्ष एमएसपी पर गेहूं बेचने वाले किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया गया था। इस बार यह राशि घटाकर केवल 15 रुपये कर दी गई है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है ऐसे में इतना कम बोनस उनकी मेहनत के साथ न्याय नहीं करता। खाद बीज डीजल और मजदूरी के बढ़ते खर्च के बीच यह फैसला उन्हें निराश कर रहा है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jeetu Patwari ने सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि जब पड़ोसी राज्य Rajasthan में गेहूं पर 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है तो मध्यप्रदेश के किसानों को सिर्फ 15 रुपये क्यों दिए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पिछले वर्ष की तरह 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए ताकि किसानों को 2700 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का भाव मिल सके।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बढ़ोतरी की मांग
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बोनस बढ़ाने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि यदि 175 रुपये का बोनस दिया जाता है तो किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और समर्थन मूल्य पर खरीदी अधिक लाभकारी बनेगी। साथ ही खरीदी केंद्रों की सूची सार्वजनिक करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की भी मांग की गई है।
जल संसाधन विभाग पर भी आरोप
गेहूं खरीदी के साथ ही कांग्रेस नेताओं ने राज्य के जल संसाधन विभाग की टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए और कहा कि प्रतिशत व्यवस्था के कारण पिछले डेढ़ साल में कोई बड़ा टेंडर जारी नहीं हुआ। उन्होंने वर्ष 2023 24 के टेंडरों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
प्रदेश की राजनीति में बढ़ा तनाव
समर्थन मूल्य और बोनस का मुद्दा अब राजनीतिक रूप ले चुका है। एक ओर किसान अधिक बोनस की उम्मीद कर रहे हैं तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है। सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज हो सकता है। किसानों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार बोनस बढ़ाकर राहत देगी।
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