दुबई संकट के बाद स्वदेश लौटी पीवी सिंधु, रैंकिंग गिरने और स्विस ओपन में भागीदारी को लेकर चिंता
मुंबई/हैदराबाद। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण दुबई में फंसी रहीं दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु सुरक्षित भारत लौट आई हैं, लेकिन अब उनकी चिंता बैडमिंटन विश्व रैंकिंग और आगामी टूर्नामेंट को लेकर है।
सिंधु बर्मिंघम में होने वाले प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जा रही थीं, तभी वहां हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानें रद्द होने से वह दुबई में फंस गईं। कई वैकल्पिक मार्ग तलाशने के बावजूद समय पर इंग्लैंड पहुंचना संभव नहीं हो पाया, जिसके चलते उन्हें टूर्नामेंट से नाम वापस लेना पड़ा।
ये भी पढ़ें मिडिल ईस्ट संकट: भारत सरकार की बड़ी एडवाइजरी; विदेशी नागरिक वीजा के लिए FRRO से करें संपर्कभारतीय खेल प्राधिकरण (साई) द्वारा आयोजित बातचीत में सिंधु ने कहा कि उन्होंने तीन स्टॉप और 24 घंटे की लंबी यात्रा का विकल्प भी देखा, लेकिन तब तक प्रतियोगिता शुरू हो चुकी होती।
अब उनका ध्यान 10 से 15 मार्च के बीच बासेल में होने वाले स्विस ओपन पर है। उन्हें बताया गया है कि अनुपस्थिति पर लगने वाला 5000 डॉलर का जुर्माना माफ किया जा सकता है, लेकिन रैंकिंग पर प्रभाव को लेकर बैटमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
सिंधु ने बताया कि उनके कोच इरवानस्याह आदि प्रतामा एयरपोर्ट पर धमाके के समय मौजूद थे, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी। उन्होंने भारतीय दूतावास और सरकार का सहयोग के लिए आभार जताया। निराशा के बावजूद सिंधु ने कहा, “मैंने ऑल इंग्लैंड के लिए कड़ी तैयारी की थी, लेकिन आखिरकार सुरक्षा सबसे पहले है।”
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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