लखनऊ में UGC एक्ट 2026 के समर्थन में निकले छात्रों पर पुलिस का एक्शन..प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने 2KM तक खदेड़ा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज (3 फरवरी 2026) 'यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026' के समर्थन और विरोध को लेकर भारी हंगामा हुआ। जहाँ पिछले कुछ दिनों से सामान्य वर्ग के छात्र इस कानून का विरोध कर रहे थे, वहीं आज OBC, SC और ST समुदायों से जुड़े छात्र संगठनों (जैसे BAPSA) ने इसके समर्थन में बड़ा मार्च निकाला। मार्च के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई जब छात्रों ने प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया और छात्रों को लगभग 2 किलोमीटर तक खदेड़ा।
मार्च के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई जब छात्रों ने प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया और छात्रों को लगभग 2 किलोमीटर तक खदेड़ा।
लखनऊ में छात्रों का मार्च और हंगामा
आज का घटनाक्रम 'यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का संवर्धन) विनियम, 2026' को लेकर राज्य में चल रहे ध्रुवीकरण का परिणाम था। बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संघ (BAPSA) और अन्य बहुजन छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ विश्वविद्यालय से परिवर्तन चौक तक पैदल मार्च निकाला। छात्रों का तर्क है कि यह कानून कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए जरूरी है। जब प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा की ओर बढ़ने लगे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के न मानने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और उन्हें खदेड़ना शुरू किया। पुलिस और छात्रों के बीच लगभग 2 किमी तक लुका-छिपी और दौड़ का सिलसिला चला। लखनऊ विश्वविद्यालय के आसपास के इलाकों को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। पुलिस ने कई छात्र नेताओं को हिरासत में भी लिया है।
क्या है 'UGC एक्ट 2026' जिस पर मचा है बवाल?
यूजीसी के इस नए नियम को लेकर छात्रों के दो गुट आमने-सामने हैं। वे इस कानून को "क्रांतिकारी" मान रहे हैं क्योंकि यह उच्च शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य 'इक्विटी कमेटी' बनाने की बात करता है, जिसमें आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा।उनका आरोप है कि यह कानून कैंपस में "जातिवाद" को और बढ़ावा देगा और इसके जरिए सामान्य वर्ग के छात्रों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस रेगुलेशन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे समर्थन करने वाले छात्र नाराज हैं और इसे लागू करने की मांग कर रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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