मेरठ के राजकीय बालगृह में मेन्टल हेल्थ मिशन इंडिया द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम
मेरठ। मेन्टल हेल्थ मिशन इंडिया द्वारा राजकीय बालगृह मेरठ में मानसिक स्वस्थ्य जागरूकता एवं शिक्षा के महत्व पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
राजकीय बालगृह मेरठ में सीसीएसयू विश्वविद्यालय, मेरठ के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व छात्रों द्वारा संचालित एक संस्था, मेन्टल हेल्थ मिशन इंडिया द्वारा, राजकीय बालगृह, मेरठ में 'मानसिक स्वस्थ्य जागरूकता एवं शिक्षा के महत्व' विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बालगृह के सभी आवासीय बच्चे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं आरसीआई लइसेंस्ड साइकोलोजिस्ट, नीतू सैनी रहीं। जिन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि सुखी और सफल जीवन के लिए जीवन कौशलों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हैं। लेकिन उससे पहले शिक्षा का जीवन में सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यक्ति के विकास, खुशी और समग्र कल्याण की नींव है। एक शिक्षित व्यक्ति बेहतर सोचता है, संवाद करता है और अपनी समस्याओं का समाधान सही मंच पर कर पाता है, इसलिए शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा जब कभी वे नकारात्मक विचारों को पाने पास पाएं तो उन्हें सकारात्मक सोच विजिट करने के लिए पॉजिटिव अफ्फर्मटिओन्स का उपयोग करना चाहिए। कार्यक्रम में काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट सोफिया खान ने मानसिक स्वास्थ्य मिशन इंडिया के उद्देश्य और मिशन से बच्चों को अवगत कराया और कहा कि खुशहाल जीवन की ओर दृष्टिकोण में परिवर्तन हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा, जीवन कौशल और आत्म-विकास पर निरंतर ध्यान देने का संदेश दिया तथा कहा कि शिक्षा किसी भी समाज में मानव की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे कोई भी कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने बच्चों के साथ एक एक्टिविटी कराइ जिसमें सभी बच्चों को अपने इमोशंस को कैसे पहचाने एवं महसूस करें इसको सिखाया जिसमे सभी प्रति भागी बच्चों ने ख़ुशी से भागेदारी की
कार्यक्रम का संचालन काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट प्रिया पाल द्वारा किया गया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि खोज और सीखने की यात्रा कभी नहीं रुकनी चाहिए। जीवन में असफलताएँ, गिरावट और निराशाएँ आ सकती हैं, लेकिन आत्म-संकल्प और आगे बढ़ने की प्रेरणा व्यक्ति को वह बना सकती है, जो वह बनना चाहता है। उन्होंने बच्चों को एक सकारात्मक आत्म-प्रेरक वाक्य भी सिखाया, जिसे निराशा के समय दोहराने को कहा गया—
“फैसला होने से पहले मैं अभी क्यों हार मानूं,
जग अभी जीता नहीं है, मैं अभी हारा नहीं हूँ।”
कार्यक्रम के अंत में राजकीय बालगृह के अधीक्षक शिव बहादुर ने मानसिक स्वास्थ्य मिशन इंडिया की टीम का आभार व्यक्त किया और बच्चों को जीवन कौशल विकसित करने तथा पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर प्रशिक्षु मनोवैज्ञानिक शिवानी शर्मा, उपाधीक्षक डॉ. अशोक सिंह एवं काउंसलर जितेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शामिल सभी बालगृह के निवासियों ने प्रेरक एवं शिक्षाप्रद गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और कार्यक्रम के बाद स्वयं को सकारात्मक व प्रसन्न अनुभव किया।
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