बापू के सिद्धांतों को नए अंदाज में पेश करती फिल्में, अहिंसा और सत्याग्रह की कहानियां जो आज भी करती हैं प्रेरित 

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मुंबई। शांति, अहिंसा और सर्वोदय के संदेश के साथ देश भर में शहीद दिवस या सर्वोदय दिवस मनाया जाता है। गांधीजी के जीवन, सिद्धांतों और विचारों ने न केवल भारत को आजादी दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को अहिंसा का मार्ग दिखाया। भारतीय सिनेमा ने उनके इन आदर्शों को विभिन्न तरीकों से पेश किया है। 

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कुछ फिल्में उनकी जीवनी पर आधारित हैं, तो कुछ ने नए अंदाज में उनके सिद्धांतों को आज के समाज से जोड़ने का काम किया है। ये फिल्में गांधीजी के सिद्धांतों को अलग-अलग रूपों में पेश करती हैं, कभी ऐतिहासिक, कभी मजाकिया तो कभी चिंतनपूर्ण। आज की पीढ़ी को इनसे प्रेरणा मिल सकती है कि अहिंसा और सत्य आज भी प्रासंगिक हैं। गांधीजी का संदेश सिनेमा के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है। 'मोहनदास' से 'बापू' तक की झलक दिखाने वाली ये फिल्में दर्शकों को गांधीजी के विचारों से जोड़ती हैं और आज के समय में उनकी प्रासंगिकता बताती हैं। इन फिल्मों की लिस्ट में साल 1982 में आई 'गांधी' से लेकर 2006 की 'लगे रहो मुन्ना भाई' तक शामिल हैं। साल 2007 में रिलीज हुई थी 'गांधी मेरे पिता' फिल्म, फिरोज अब्बास खान के निर्देशन में बनी फिल्म में अक्षय खन्ना, दर्शन जरिवाला, शेफाली शाह और भूमिका चावला मुख्य कलाकार के तौर पर हैं। फिल्म गांधीजी और उनके बेटे हरिलाल के बीच तनावपूर्ण रिश्ते पर केंद्रित है। पिता-पुत्र संबंध, गांधीजी के सिद्धांतों का परिवार पर प्रभाव और व्यक्तिगत संघर्ष को इसमें दिखाया गया है।

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कॉमेडी-ड्रामा लगे रहो मुन्नाभाई साल 2006 में रिलीज हुई थी। गांधीजी के सिद्धांतों को मजेदार और नए अंदाज में पेश करती फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी हैं। वहीं, संजय दत्त, अरशद वारसी, विद्या बालन मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म के जरिए दिखाया गया कि कैसे एक गुंडा गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर सत्य, अहिंसा और प्रेम से जीवन बदल लेता है। फिल्म आज के समाज में गांधीवाद की प्रासंगिकता दिखाती है।

 

 

'मैंने गांधी को नहीं मारा' जाहनु बरुआ की फिल्म है, जो साल 2005 में रिलीज हुई थी। अनुपम खेर के साथ उर्मिला मातोंडकर इसमें लीड रोल में हैं। यह अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति की कहानी है, जो मानता है कि उसने गांधीजी को मारा। यह गांधीजी की हत्या का सामाजिक प्रभाव और उनके सिद्धांतों की याद दिलाती फिल्म है, जो गांधीजी के विचारों को आज के संदर्भ में जोड़ती है। 'हे राम' फिल्म साल 2000 में रिलीज हुई थी, जिसका निर्देशन करने के साथ ही लेखन और अभिनय भी कमल हासन ने किया। फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म विभाजन, डायरेक्ट एक्शन डे और गांधीजी की हत्या की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह गांधीजी के विचारों पर गहरा चिंतन कराती है। 'महात्मा का निर्माण' 1996 में रिलीज हुई थी। श्याम बेनेगल निर्देशत फिल्म में राजित कपूर, पल्लवी जोशी लीड रोल में हैं। फिल्म गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका के समय पर फोकस करती है, जहां वह सत्याग्रह की शुरुआत करते हैं।

 

 

महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित क्लासिक फिल्म 'गांधी' साल 1982 में आई। रिचर्ड एटनबरो के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बेन किंग्सले ने गांधीजी की भूमिका निभाई थी। रोहिणी हट्टंगड़ी कस्तूरबा की भूमिका में और रोशन सेठ जवाहर लाल नेहरू की रोल में थे। फिल्म की थीम अहिंसा, सत्याग्रह और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम है, जो गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत लौटने और आजादी तक की यात्रा दिखाती है। महात्मा गांधी के वैश्विक प्रभाव को बखूबी दर्शाती यह फिल्म ऑस्कर जीत चुकी है।

 

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लेखक के बारे में

अर्चना सिंह | Online News Editor Picture

मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।

वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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