शीतलहर ने बढ़ाई किसानों की चिंता, रबी फसलों में कीट और रोग से बचाव के जरूरी उपाय
दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई ठंड अब जनवरी में और तेज होती जा रही है। तापमान में लगातार गिरावट का असर सीधा खेतों में खड़ी फसलों पर दिखाई देने लगा है। ठंड बढ़ते ही कीट और रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है जिससे किसान काफी चिंतित हैं। अगर समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो फसल की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
रबी फसलों में बढ़ रहा कीट और रोगों का खतरा
समय पर निगरानी से बच सकता है बड़ा नुकसान
बदलते मौसम में सबसे जरूरी है फसलों की नियमित निगरानी। खेत का लगातार निरीक्षण करने से शुरुआती लक्षण समय रहते पकड़ में आ जाते हैं। इससे फसल को ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है। यदि फसल की बढ़वार रुकने लगे या पत्तियों का रंग बदलने लगे तो इसे हल्के में न लें।
चने की फसल में इल्ली से कैसे करें बचाव
चना की फसल में इल्ली का प्रकोप दिखने पर सबसे पहले निगरानी बढ़ाएं। खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाने से इल्ली की संख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है। जैविक उपाय अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है और लागत भी कम होती है। जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार दवा का छिड़काव करना लाभदायक रहता है।
सरसों धनिया और मेथी में माहू नियंत्रण
ठंड के मौसम में माहू तेजी से फैलता है। इससे पत्तियां मुड़ने लगती हैं और पौधों की ताकत कम हो जाती है। जैविक तरीके से नियंत्रण करने पर फसल पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। अगर प्रकोप ज्यादा हो जाए तो संतुलित मात्रा में रासायनिक उपचार करना जरूरी हो जाता है।
लहसुन की फसल में पीलापन क्यों आता है
लहसुन में पीलापन पोषक तत्वों की कमी या फफूंद जनित रोगों के कारण हो सकता है। समय पर दवा का छिड़काव करने से पत्तियों की हरियाली वापस आ सकती है। इससे गांठों का विकास भी बेहतर होता है और उपज पर सकारात्मक असर पड़ता है।
पाले से फसलों को कैसे बचाएं
जनवरी में पाले का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। पाला पड़ने से फूल और कोमल हिस्से झुलस सकते हैं। ऐसी स्थिति में पहले से तैयारी करना जरूरी होता है। हल्के घोल का छिड़काव करने से पाले का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है और फसल सुरक्षित रहती है।
सावधानी और समय पर इलाज ही है सबसे बड़ा समाधान
अगर किसान बदलते मौसम में घबराने के बजाय सतर्कता रखें और समय पर सही उपाय अपनाएं तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। संतुलित पोषण नियमित निगरानी और सही समय पर उपचार से शीतलहर के बावजूद अच्छी पैदावार संभव है।
