ठंड और पाले से आलू की फसल को बचाएं, तापमान गिरते ही अपनाएं ये जरूरी उपाय
ठंड का असर अब तेजी से बढ़ता जा रहा है और तापमान लगातार नीचे गिर रहा है। पिछले कुछ समय में न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला गया है। ऐसे हालात में आलू की फसल पर पाले का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह समय आलू की खेती के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसी दौर में कंद विकास की प्रक्रिया चल रही होती है।
तापमान गिरने पर कैसे होता है आलू को नुकसान
पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई है सबसे कारगर
पाले से बचने के लिए समय रहते सतर्कता बरतना बहुत जरूरी है। सबसे प्रभावी उपायों में हल्की सिंचाई को माना जाता है। पाले की आशंका होने पर शाम के समय खेत में हल्की सिंचाई करने से जमीन में नमी बनी रहती है। इससे खेत का तापमान संतुलित रहता है और पाले का असर काफी हद तक कम हो जाता है। सूखी जमीन में पाला ज्यादा तेजी से पड़ता है इसलिए नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
धुएं की विधि से भी कम किया जा सकता है पाले का असर
पाले से बचाव के लिए धुएं की विधि भी काफी कारगर मानी जाती है। शाम के समय खेत की मेड़ों पर फसल के अवशेष सूखी पत्तियां या गोबर के उपले जलाकर धुआं किया जाता है। इससे खेत के आसपास का तापमान कुछ हद तक बढ़ जाता है और ठंडी हवा का प्रभाव कम हो जाता है। यह तरीका अचानक गिरते तापमान में फसल को सुरक्षा देने में मदद करता है।
कंद विकास के समय पोषण पर भी दें ध्यान
इस समय आलू की फसल में कंद विकास की अवस्था चल रही होती है। ऐसे में पाले से सुरक्षा के साथ साथ पौधों को संतुलित पोषण देना भी जरूरी होता है। हल्की सिंचाई के साथ जरूरी पोषक तत्वों का ध्यान रखने से कंद का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होते हैं।
लगातार निगरानी से बच सकता है बड़ा नुकसान
अगर तापमान में और गिरावट आती है तो खेत की नियमित निगरानी बहुत जरूरी हो जाती है। समय पर किए गए छोटे छोटे उपाय आलू की फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं। सतर्कता और सही देखभाल से ठंड और पाले के बावजूद अच्छी पैदावार संभव है।
