सेहत के लिए संजीवनी है शहद और लहसुन का मिश्रण, हृदय रोगों में लाभकारी

नई दिल्ली। आयुर्वेद में प्रकृति से मिली जड़ी-बूटियों से सदियों से रोगों का इलाज किया जा रहा है। कुछ जड़ी-बूटियां हमारी किचन में ही मौजूद हैं, जिनके सेवन मात्र से शरीर को सेहत का वरदान मिल सकता है।
लहसुन और शहद दोनों ही ऐसी चीजें हैं, जो आसानी से हर घर में मिल जाती हैं, लेकिन इन दोनों चीजों का मिश्रण शरीर के लिए संजीवनी है। लहसुन और शहद हृदय रोग और मंद पड़े पाचन को दुरुस्त करने में सहायक हैं। लहसुन का इस्तेमाल सब्जियों के अलावा रोगों में किया जाता है। आयुर्वेद में बड़े हुए कोलेस्ट्रोल से पीड़ित लोगों को ताजा लहसुन की कलियां खाने की सलाह दी जाती है। लहसुन में स्वास्थ्यवर्धक तत्व एलिसिन होता है, जो एक तरह का एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट है। इसके सेवन से रक्त का संचार शरीर में सही बना रहता है और रक्त गाढ़ा भी नहीं होता है।
ये भी पढ़ें आयुर्वेद का मल्टीविटामिन: विटामिन की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान है चक्रमुनि का पौधालहसुन में ऑक्सीजन, सल्फर और अन्य रसायन होते हैं, जो लहसुन को जीवाणुरोधी और रोग-रोधी गुण प्रदान करते हैं। वहीं शहद प्राकृतिक से मिली वो मीठी वस्तु है, जिसका सेवन मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के स्वास्थ्य को भी कम प्रभावित करता है। शहद में फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स नाम के दो एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में खुजली, लालिमा, और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। शहद में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो कई बीमारियों में सहायक हैं। अब बात करते हैं लहसुन और शहद के मिश्रण की। लहसुन और शहद को एक साथ मिलाकर रखने से इसके गुण दोगुने हो जाते हैं।
ये भी पढ़ें डिजिटल युग में आंखें हो रही बीमार, आयुर्वेद से जानें मोबाइल स्ट्रेस से राहत पाने के तरीकेइथियोपियाई चिकित्सा में लहसुन और शहद के मिश्रण को शरीर के लिए संजीवनी कहा गया है, जो श्वसन रोग, संक्रमण, त्वचा संबंधी रोग, हृदय रोग और पेट से जुड़े रोगों का काल है। यह मिश्रण सर्दी-जुकाम और खांसी के लक्षणों को कम करने में मदद करता है और रक्त को पतला कर स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। इसके साथ यह उच्च रक्तचाप, गठिया, दांत दर्द, कब्ज और संक्रमण में भी सहायक है। इसके लिए कांच की साफ बरनी में ताजा लहसुन की कलियों को छीलकर डाल लें। बरनी में शुद्ध शहद को भरकर 5 से 7 दिन के लिए रख दें और फर्मेंट होने के बाद सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। बच्चे और गर्भवती महिलाएं चिकित्सा की सलाह के बाद ही सेवन का मिश्रण करें।
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