डिजिटल युग में आंखें हो रही बीमार, आयुर्वेद से जानें मोबाइल स्ट्रेस से राहत पाने के तरीके
नई दिल्ली। आज की जीवनशैली ऐसी है कि हर काम कंप्यूटर या मोबाइल पर निर्भर हो गया है। सुबह आँख खुलते ही मोबाइल स्क्रीन और रात सोने से पहले तक डिजिटल उपकरणों की रोशनी हमारी आँखों और मस्तिष्क पर निरंतर प्रभाव डालती रहती है। घंटों स्क्रीन पर बिताने के बाद आँखों पर तनाव बढ़ने लगता है और सिर भी भारी हो जाता है। इससे नींद से लेकर खाना भी प्रभावित होता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर आंखों को बड़ी क्षति पहुँच सकती है। डिजिटल युग में शारीरिक कम और मानसिक थकान ज्यादा होती है और इसके पीछे का कारण है, हमारी खराब जीवनशैली और अत्याधिक डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता।
इससे न सिर्फ बेवजह का तनाव महसूस होता है, बल्कि आँखों में जलन, सिरदर्द, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है लेकिन आयुर्वेद में इन सभी परेशानियों का हल छिपा हैं। कुछ आसान तरीकों से आंखों के स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। काम करते वक्त हम पलकों को झपकाना भूल जाते हैं, जिससे आंखों में पानी और रूखेपन की समस्या बढ़ती है। ऐसे में कोशिश करें कि पलकों को लगातार झपकाते रहें और स्क्रीन पर लगातार न देखें। इससे आंखों को कम क्षति होती है और तनाव भी कम होता है। आयुर्वेद मानता है कि रात के समय शरीर में कफ की वृद्धि अधिक होती है और इस समय शरीर को पूरा आराम देने की जरूरत होती है। ऐसे में मोबाइल स्क्रीन पर नजर गढ़ाए रखने से नींद प्रभावित होती है और मस्तिष्क नींद लाने वाले मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम करता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से यह कफ और पित्त के असंतुलन का कारण बनता है। ऐसे में रात के समय स्क्रीन से दूरी बनाकर रखें। बहुत कम लोग जानते हैं कि आंखों का संबंध पाचन से भी है।
अगर पाचन कमजोर है तो इससे आंखों की रोशनी भी प्रभावित होती है क्योंकि आंखों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक तनाव बढ़ता है, जिससे पाचन की क्रिया धीमी पड़ जाती है और खाना अच्छे से पेट में पच नहीं पाता। ऐसे में अपने पाचन का पूरा ख्याल रखें। इसके अलावा, आंखों की थकान को कम करने के लिए त्रिफला के पानी से नेत्र शोधन, घी से पोषण नेत्र योग और ठंडे पानी से भी आंखों को धो सकते हैं। यह आंखों का तनाव कम करने में मदद करेगी।
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