गाजियाबाद: सामुदायिक भवनों की बुकिंग में फर्जीवाड़े पर महापौर का कड़ा प्रहार, छूट के विशेषाधिकार पर लगाई रोक

गाजियाबाद। गाजियाबाद नगर निगम के सामुदायिक भवनों और अविकसित पार्कों की बुकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। महापौर सुनीता दयाल ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से अपने उस विशेषाधिकार पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है, जिसके तहत वे जरूरतमंदों को बुकिंग शुल्क में रियायत प्रदान करती थीं। अब शहर के किसी भी सामुदायिक भवन या पार्क को बुक करने के लिए आवेदक को निर्धारित पूरी धनराशि जमा करनी होगी।
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ये भी पढ़ें यमुना प्राधिकरण ने स्पार्क मिंडा को 7 एकड़ भूखंड का लेटर ऑफ़ इनटेंट सौंपा, 220 करोड़ निवेश की योजना इस कड़े फैसले के पीछे नगर निगम में चल रहा एक बड़ा फर्जीवाड़ा है। हाल ही में यह तथ्य प्रकाश में आया कि नगर निगम के दो बाबुओं ने मिलीभगत कर महापौर के फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर सामुदायिक भवनों की बुकिंग की थी। इस धोखाधड़ी के जरिए निगम के राजस्व को चूना लगाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर के निर्देश पर संलिप्त दोनों बाबुओं के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।
प्रशासनिक त्रुटियों को सुधारने की कवायद
महापौर सुनीता दयाल ने स्पष्ट किया कि सामान्यतः महापौर का प्रशासनिक कार्यों में सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और कई प्रशासनिक त्रुटियां नजर आई हैं। ऐसी स्थिति में विशेषाधिकार के दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने निर्णय लिया है कि जब तक व्यवस्था को पूरी तरह त्रुटिहीन और पारदर्शी नहीं बना लिया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।
पूरी धनराशि जमा करना होगा अनिवार्य
महापौर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब नगर निगम के किसी भी सामुदायिक केंद्र या अविकसित पार्क की बुकिंग के लिए शासन द्वारा निर्धारित पूर्ण शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य होगा। महापौर ने कहा कि वे समय-समय पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर शुल्क में छूट देती थीं, लेकिन कर्मचारियों की अनैतिक गतिविधियों के कारण इस सुविधा को फिलहाल बंद करना पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति
नगर निगम प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस प्रकरण की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने मामलों में फर्जी तरीके से छूट दी गई है। महापौर के इस निर्णय से उन बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मचारियों पर लगाम कसेगी जो सत्ता के नाम पर अवैध वसूली या धोखाधड़ी में लिप्त थे। आगामी दिनों में बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और मानव हस्तक्षेप से मुक्त करने पर भी विचार किया जा सकता है।
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