मुरादाबाद: मेयर बनाम एसडीएम; सरकारी जमीन पर चले बुलडोजर ने बढ़ाई सियासी तपिश, विनोद अग्रवाल ने खोला मोर्चा

मुरादाबाद। पीतल नगरी में सरकारी जमीन पर हुई बुलडोजर कार्रवाई ने अब एक बड़े राजनैतिक युद्ध का रूप ले लिया है। मुरादाबाद के महापौर विनोद अग्रवाल ने सीधे तौर पर सदर तहसील की टीम और एसडीएम डॉ. राम मोहन मीणा पर अविश्वास जताते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मेयर का कहना है कि यह कार्रवाई उनकी 40 वर्षों की राजनीतिक छवि को धूमिल करने की एक गहरी साजिश है।
मुख्य विवाद और मेयर के आरोप:
-
छवि बिगाड़ने की साजिश: मेयर विनोद अग्रवाल का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर उन्हें और भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहा है ताकि उनका राजनीतिक प्रभाव कम किया जा सके।
-
सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन: महापौर ने दावा किया कि बुलडोजर चलाने से पहले 15 दिन का अनिवार्य नोटिस नहीं दिया गया, जो सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अवहेलना है।
-
दूसरे जिले से जांच की मांग: मेयर ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर मांग की है कि इस जमीन की पैमाइश मुरादाबाद के बजाय किसी अन्य जिले की टीम से कराई जाए, क्योंकि उन्हें स्थानीय तहसील टीम पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।
-
महापौर विनोद अग्रवाल ने कहा कि वह पिछले लगभग 40 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी और संगठन के लिए समर्पित होकर काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई द्वेष भावना से की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से की गई यह कार्रवाई उन्हें बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है।
इस पूरे मामले को लेकर महापौर ने मंडलायुक्त को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें उन्होंने विवादित जमीन की पैमाइश किसी अन्य जिले की टीम से कराने की मांग की है। महापौर का कहना है कि यदि किसी अन्य जिले के उपजिलाधिकारी की निगरानी में जमीन की पैमाइश कराई जाएगी तो जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकेगी।
महापौर ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि मुरादाबाद सदर के उपजिलाधिकारी और लेखपाल के कार्यों पर उन्हें संदेह है, इसलिए उनसे निष्पक्ष न्याय की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए मंडलायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
मेयर का यह भी आरोप है कि सदर एसडीएम द्वारा की गई कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार किसी भी अतिक्रमण को हटाने से पहले कम से कम 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है और इसकी सूचना संबंधित ईमेल व्यवस्था के माध्यम से जिलाधिकारी को भी भेजना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में इन नियमों का पालन नहीं किया गया।
महापौर ने यह भी कहा कि भाजपा नेता अमित चौधरी की जमीन भी उसी क्षेत्र में स्थित है और उनकी बाउंड्री वॉल को भी बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने इसे भी गलत और नियमों के विरुद्ध बताया।
महापौर के अनुसार इस प्रकार की कार्रवाई से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति बनी रहती है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने मुरादाबाद में प्रशासन और सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
कार्यकर्ताओं का मनोबल और चुनावी चेतावनी:
मेयर ने भाजपा नेता अमित चौधरी की बाउंड्री वॉल गिराए जाने का भी विरोध किया और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि प्रशासन के इस अड़ियल रवैये से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है, जिसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

टिप्पणियां