सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: लागत से चार से छह गुना अधिक टोल वसूली होने पर निरस्त होंगे टोल प्लाजा
नई दिल्ली। देशभर के वाहन चालकों और आम जनता के लिए राहत भरी खबर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टोल वसूली के नियमों पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि किसी सड़क परियोजना की निर्माण लागत से चार से छह गुना तक अधिक टोल वसूली हो चुकी है, तो ऐसे टोल प्लाजा को अब और अधिक जारी रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में टोल प्लाजा को तत्काल प्रभाव से रद्द या निरस्त किया जा सकता है।
पारदर्शिता और नियमों पर अदालत की तल्ख टिप्पणी
माननीय न्यायालय ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कई सड़कों पर निर्माण की मूल लागत निकलने के वर्षों बाद भी एजेंसियां मनमाने तरीके से वसूली जारी रखे हुए हैं। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता का होना अनिवार्य है। टोल वसूली केवल उसी अवधि और सीमा तक होनी चाहिए जितनी कि नियमों के तहत निर्धारित की गई है। कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रोजेक्ट की लागत पूरी होने और उससे कई गुना मुनाफा कमाने के बाद जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना किसी भी सूरत में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
देवास-भोपाल मार्ग से शुरू हुआ कानूनी संग्राम
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के देवास और भोपाल मार्ग के बीच संचालित टोल प्लाजा से संबंधित एक याचिका के बाद चर्चा में आया। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा था कि उक्त सड़क के निर्माण में जितना खर्च हुआ था, एजेंसियां उससे कहीं ज्यादा रकम वसूल चुकी हैं। लंबे समय से चल रही इस वसूली को लेकर जनता में भारी आक्रोश था। इसी मामले की गहराई से समीक्षा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया कि यदि वसूली लागत की तुलना में कई गुना अधिक हो चुकी है, तो ऐसे प्लाजा को बंद करने पर विचार किया जाना चाहिए।
आम जनता को मिलेगी बढ़ती महंगाई से बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को देशभर के करोड़ों वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। यदि इस आदेश को कड़ाई से लागू किया जाता है, तो देश के विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर वर्षों से जमे कई टोल प्लाजा को हटाना पड़ेगा। इससे न केवल निजी वाहन चालकों को फायदा होगा बल्कि माल ढुलाई की लागत कम होने से आवश्यक वस्तुओं के दामों में भी गिरावट आने की संभावना है।
सरकार और निर्माण एजेंसियों को कड़े निर्देश
न्यायालय ने संबंधित सरकारी विभागों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी एजेंसियों को निर्देशित किया है कि वे टोल परियोजनाओं की लागत और अब तक हुई कुल वसूली का सही विवरण सार्वजनिक करें। भविष्य में टोल परियोजनाओं के लिए तय किए जाने वाले अनुबंधों में भी इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है कि वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी हो। जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी टोल नीतियों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
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