UP: गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, एजेंसी मालिक पर शिकंजा..150 फैक्ट्रियों पर संकट और बेरोजगारी का डर
गोरखपुर में ब्लैक मार्केटिंग के आरोप में दो गैस एजेंसियों को सील कर दिया गया, मालिक गिरफ्तार
कानपुर। शहर में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। हालिया छापेमारी में भारी मात्रा में सिलेंडर बरामद किए गए हैं और दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। इसी बीच गोरखपुर में ब्लैक मार्केटिंग के आरोप में दो गैस एजेंसियों को सील कर दिया गया। उनके मालिक को गिरफ्तार किया गयाहै।
जिला प्रशासन की टीम ने हाल ही में शहर के अलग-अलग इलाकों (जैसे ग्वालटोली और न्यू आजादनगर) में छापेमारी की। इस दौरान भारी मात्रा में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर (लगभग 49 से अधिक) और रिफिलिंग उपकरण बरामद किए गए हैं। कालाबाजारी में लिप्त पाए जाने पर गैस एजेंसी के कर्मचारियों और मालिकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।प्रशासन के पास गैस आपूर्ति से जुड़ी 100 से अधिक शिकायतें पहुंची थीं, जिसके बाद जिलाधिकारी (DM) ने सख्त मॉनिटरिंग के आदेश दिए।
150 फैक्ट्रियों पर संकट और बेरोजगारी का डर
गैस आपूर्ति की चेन प्रभावित होने और कालाबाजारी के खिलाफ हो रही सख्त कार्रवाई के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में भी हलचल है। अवैध सप्लाई और कालाबाजारी पर लगाम कसने से करीब 150 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई है।औद्योगिक संगठनों का मानना है कि अगर कमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो उत्पादन ठप हो सकता है। इससे इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले लगभग 1 लाख मजदूरों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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