अखिलेश यादव का यूपी सरकार पर बड़ा हमला, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम की शर्तों को बताया 'अतार्किक'
लखनऊ। सपा प्रमुख व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार की ओर से लगाई गई शर्तों पर सोशल मीडिया के जरिए तीखा तंज किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि सरकार ने शर्तें इतनी बढ़ा दी हैं कि “आंख व मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते।” सपा प्रमुख व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि यूपी की भाजपा सरकार विशेष समाज के सम्मान की अवहेलना कर रही है और अपमान का रास्ता अपनाकर समाज के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि मंत्री, सांसद, विधायक और पार्षद भी इस मामले में समाज के सामने अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं और अपनी स्वार्थपूर्ण राजनीति के कारण समाज में अपना सम्मान खो चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सच्चे शुभचिंतक अन्य दलों से संपर्क साध रहे हैं, जिन्होंने हमेशा सनातन धर्म और समाज का सम्मान किया और उन्हें यथोचित मान-स्थान प्रदान किया। वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि कोविड-19 के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का अनुपालन भाजपा की अपनी बैठकों या आयोजनों में किस तरह किया गया। अखिलेश यादव ने इसे असंगत और अतार्किक बताया और कहा कि इसी कारण “बाटी-चोखा” वाली बैठक पर पाबंदी लगाई गई थी। उन्होंने कहा, “अतार्किक बंदिशें लगाना कमजोर सत्ता की पहचान होती है। निंदनीय और घोर आपत्तिजनक, विनाशकाले विपरीत बुद्धि।" बता दें कि प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देते हुए सख्त नियम और शर्तें लागू की हैं ताकि शांति, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
इन शर्तों के अनुसार किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर सीमित संख्या में ही वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा और पार्किंग की व्यवस्था इस तरह की जाएगी कि यातायात बाधित न हो। इसके साथ ही आयोजकों को केवल पारंपरिक ध्वज-दंड रखने की अनुमति होगी और किसी भी प्रकार की घातक वस्तु लाने पर रोक रहेगी। शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर, ढोल-नगाड़े या तेज संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी और ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी और आवश्यक होने पर पुलिस बल की व्यवस्था का खर्च भी आयोजकों को वहन करना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो कार्यक्रम की अनुमति स्वतः निरस्त कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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