मार्च की गर्मी से गेहूं की फसल बचाने का आसान तरीका जानिए दाने क्यों रह जाते हैं छोटे और कैसे बढ़ेगी पैदावार
मार्च का महीना गेहूं की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस समय खेतों में फसल अपने अंतिम और सबसे अहम चरण में पहुंच जाती है। पौधों में बालियां निकल चुकी होती हैं और दाने बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यही वह समय होता है जब थोड़ी सी लापरवाही भी उत्पादन पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर मौसम संतुलित रहे तो गेहूं की फसल अच्छी तरह तैयार होती है और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलता है। लेकिन कई बार मार्च में अचानक तापमान बढ़ने लगता है जिससे फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है।
बढ़ता तापमान क्यों बन जाता है गेहूं के लिए खतरा
जब मार्च में तापमान तेजी से बढ़ता है तो इसका सीधा असर गेहूं के दानों के विकास पर पड़ता है। इस समय फसल दुधिया अवस्था में होती है। इस अवस्था में दाने के अंदर दूध जैसा पदार्थ होता है जो धीरे धीरे मजबूत होकर पूरा दाना बनता है।
ये भी पढ़ें PM Kisan Yojana: बड़ी खुशखबरी 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के खाते में ट्रांसफर हुए 2000 रुपयेअगर इसी समय तेज गर्मी पड़ने लगे तो दाने का विकास सही तरह से नहीं हो पाता। कई बार दाने छोटे रह जाते हैं या पिचक जाते हैं। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता खराब होती है बल्कि उत्पादन भी कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में मेहनत करने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक पैदावार नहीं मिल पाती।
ये भी पढ़ें भिंडी की खेती में येलो वेन मोजैक वायरस से बचने का आसान तरीका किसान ऐसे बचाएं 90 प्रतिशत तक नुकसानखेत में नमी बनाए रखना क्यों जरूरी है
गेहूं की फसल को तेज गर्मी से बचाने के लिए खेत की मिट्टी में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी माना जाता है। जब मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है तो खेत का तापमान संतुलित रहता है और पौधों पर गर्मी का असर कम पड़ता है।
नमी की वजह से पौधों को जरूरी पोषण भी सही तरीके से मिलता रहता है और दानों का विकास सामान्य रूप से होता रहता है। इसलिए इस समय खेत की स्थिति पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है।
शाम के समय हल्की सिंचाई क्यों होती है फायदेमंद
गेहूं की फसल को सुरक्षित रखने के लिए समय समय पर हल्की सिंचाई करना काफी फायदेमंद माना जाता है। खासतौर पर शाम के समय की गई सिंचाई ज्यादा असरदार होती है।
शाम के समय जब सिंचाई की जाती है तो मिट्टी की गर्मी कम हो जाती है और खेत में ठंडक बनी रहती है। इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पौधों को गर्म हवा से राहत मिलती है। इस वजह से दानों का विकास भी बेहतर तरीके से होता रहता है।
थोड़ी सी सावधानी से बढ़ सकती है पैदावार
अगर मार्च के महीने में तापमान लगातार बढ़ रहा हो तो हल्की सिंचाई की प्रक्रिया को समय समय पर दोहराना चाहिए। इससे खेत में नमी बनी रहती है और फसल को गर्मी से बचाने में मदद मिलती है।
जब मिट्टी में नमी बनी रहती है तो दानों का विकास सही तरीके से होता है और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। इस तरह थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर सिंचाई करके गेहूं की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
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