जायद सीजन की सुपरहिट फसल तर ककड़ी 60 दिन में तैयार और एक एकड़ से 1 लाख तक कमाई
अगर आप कम समय में अच्छी कमाई देने वाली फसल की तलाश कर रहे हैं तो तर ककड़ी की खेती आपके लिए एक शानदार विकल्प बन सकती है. जायद सीजन की यह फसल किसानों को बहुत कम समय में अच्छा मुनाफा दे सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मार्च का महीना तर ककड़ी की बुवाई के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. सही समय पर बुवाई करने से फसल तेजी से बढ़ती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.
मार्च में बुवाई से मिलता है बेहतर उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ के अनुसार तर ककड़ी की खेती के लिए मार्च का महीना सबसे अनुकूल माना जाता है. इस समय तापमान और मिट्टी की नमी दोनों फसल के विकास के लिए उपयुक्त रहती हैं. इसलिए इस समय बोई गई फसल जल्दी बढ़ती है और अच्छी पैदावार देती है.
ये भी पढ़ें रबी के बाद कमाई का शानदार मौका, 60 दिन में तैयार होगी मूंग की फसल, कम लागत में 50 हजार तक मुनाफाजायद सीजन में उगाई जाने वाली फसलें सामान्यत कम समय में तैयार हो जाती हैं. तर ककड़ी भी ऐसी ही फसल है जो किसानों को जल्दी उत्पादन और जल्दी आमदनी देती है.
ये भी पढ़ें भिंडी की खेती में येलो वेन मोजैक वायरस से बचने का आसान तरीका किसान ऐसे बचाएं 90 प्रतिशत तक नुकसान60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है फसल
तर ककड़ी की फसल लगभग 60 से 70 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है. इसकी सबसे खास बात यह है कि बुवाई के लगभग 40 से 45 दिनों बाद ही इसकी तुड़ाई शुरू हो जाती है. यानी किसान को बहुत जल्दी बाजार में फसल बेचने का मौका मिल जाता है.
पौधों में लगभग 30 से 35 दिनों के भीतर फूल आने लगते हैं और डेढ़ महीने के भीतर फल लगना शुरू हो जाता है. इस कारण यह फसल किसानों के लिए जल्दी आय देने वाली खेती मानी जाती है.
एक एकड़ में 80 हजार से 1.2 लाख तक मुनाफा
अगर किसान तर ककड़ी की खेती सही तकनीक के साथ करते हैं तो एक एकड़ खेत से लगभग 80 हजार से 1.2 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिल सकता है. बाजार में गर्मी के मौसम में ककड़ी की मांग बढ़ जाती है इसलिए किसानों को अच्छी कीमत भी मिलती है.
आधुनिक तकनीक और सही खेती पद्धति अपनाने से उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं. यही कारण है कि कई किसान अब जायद सीजन में तर ककड़ी की खेती को तेजी से अपना रहे हैं.
अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी जरूरी
तर ककड़ी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण होती है. किसानों को खेत में एक से दो बार गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी नरम और भुरभुरी बन सके.
इसके बाद खेत में लगभग पांच फीट की दूरी पर नालियां बनाना बेहतर माना जाता है. इससे पानी का निकास सही रहता है और पौधों की जड़ों का विकास भी बेहतर होता है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अधिक उत्पादन के लिए सिंजेटा क्रिस्पी और वीएनआर कृष जैसी हाइब्रिड किस्मों का चयन करना बेहतर माना जाता है. इन किस्मों के बीज कम देखभाल में भी अच्छा उत्पादन दे सकते हैं.
सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ता है उत्पादन
तर ककड़ी की खेती में नियमित सिंचाई बहुत जरूरी होती है. बुवाई के बाद खेत में समय समय पर पानी देना जरूरी होता है ताकि पौधों की बढ़वार सही तरीके से हो सके.
मल्चिंग तकनीक अपनाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं. इससे पौधों का विकास तेजी से होता है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है.
विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान सिंचाई और मल्चिंग पर सही ध्यान दें तो तर ककड़ी की पैदावार में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है.
कीट रोग नियंत्रण से बचती है पूरी फसल
तर ककड़ी की फसल में कुछ कीट भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनमें पत्ती काटने वाला कीट जिसे कई क्षेत्रों में कतुआ या लाल कीड़ा कहा जाता है काफी खतरनाक माना जाता है. यह कीट पत्तियों को काटकर पौधों की वृद्धि रोक देता है.
इसके नियंत्रण के लिए किसानों को इमिडाक्लोप्रिड का लगभग दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. इसके अलावा रेड पंपकिन बीटल भी ककड़ी की फसल को नुकसान पहुंचाने वाला प्रमुख कीट है.
इस कीट के नियंत्रण के लिए साइपरमेथ्रिन युक्त सिंबुस दवा का छिड़काव किया जा सकता है. इसका उपयोग लगभग डेढ़ से दो मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से करना प्रभावी माना जाता है.
सही तकनीक से किसान कमा सकते हैं अच्छा मुनाफा
अगर किसान तर ककड़ी की खेती में सही किस्म का चयन करें खेत की तैयारी सही तरीके से करें और समय पर सिंचाई तथा कीट नियंत्रण करें तो कम लागत में अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
जायद सीजन में इसकी खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का अच्छा अवसर बन सकती है क्योंकि यह फसल कम समय में तैयार होकर जल्दी बाजार में बिक जाती है.
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