बागपत- फरमान के पिता का कड़ा रुख, कहा- "मोनालिसा हमारे घर की बहू कभी नहीं बन सकती"
बागपत। जब से फरमान और मोनालिसा की शादी या करीबी रिश्तों की खबरें सामने आई हैं, तब से फरमान का परिवार गहरे तनाव में है। आज फरमान के पिता ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बेटे से सारे रिश्ते तोड़ने तक की बात कह दी है।
"हमारे दरवाजे बंद हैं"
फरमान के पिता ने मीडिया से बात करते हुए अपना गुस्सा इन शब्दों में जाहिर किया। "यह शादी हमें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। हमने अपने बेटे के लिए कुछ और सोचा था, लेकिन उसने हमारी परवरिश और सम्मान का ख्याल नहीं रखा।"उन्होंने साफ लहजे में कहा कि वह मोनालिसा और फरमान दोनों को अपने घर की चौखट नहीं लांघने देंगे। अगर वे जबरदस्ती कोशिश करेंगे, तो अंजाम बुरा होगा।पिता का आरोप है कि चकाचौंध की दुनिया में खोकर उनका बेटा अपनी जड़ों और संस्कारों को भूल गया है। मोनालिसा और फरमान खान ने हाल ही में केरल के एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की है। फरमान खान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता खेती-किसानी करते हैं और परिवार साधारण किसान पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है।
विवाद की वजह क्या है?
बताया जा रहा है कि फरमान का परिवार काफी पारंपरिक है, जबकि मोनालिसा की अपनी एक अलग पहचान और ग्लैमरस इमेज है। उम्र के फासले (यदि लागू हो) या पूर्व के रिश्तों को लेकर परिवार के भीतर लंबे समय से बहस चल रही थी। फरमान के इस 'फरमान' ने आग में घी डालने का काम किया है। प्रशंसकों का कहना है कि यह उनका निजी मामला है और प्यार में परिवार को बीच में नहीं आना चाहिए। अभी तक फरमान की ओर से अपने पिता के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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