तेज गर्मी से फसलों को बड़ा खतरा, गेहूं और सब्जियों की पैदावार पर असर, कृषि वैज्ञानिकों ने बताए Heat Protect Crops के जरूरी उपाय
मार्च के पहले पखवाड़े में ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। कई इलाकों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर वे किसान जिनकी रबी फसल देर से बोई गई थी उनके लिए यह मौसम चुनौती बन सकता है। अचानक बढ़ी गर्मी का असर गेहूं जौ और सब्जियों की फसल पर पड़ सकता है और इससे पैदावार में कमी की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में जरूरी है कि किसान सही समय पर सही उपाय अपनाएं ताकि फसल सुरक्षित रहे और मेहनत का पूरा फल मिल सके।
गेहूं की फसल को तेज गर्मी से ऐसे बचाएं
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान लगातार बढ़ने की स्थिति में गेहूं की फसल को बचाने के लिए विशेष पोषक तत्वों का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किसान 200 लीटर पानी में 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। इससे गेहूं की फसल पर गर्मी का असर कम होता है और दाने बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है।
ये भी पढ़ें रबी के बाद कमाई का शानदार मौका, 60 दिन में तैयार होगी मूंग की फसल, कम लागत में 50 हजार तक मुनाफाइसके अलावा 200 लीटर पानी में 4 किलो पोटेशियम नाइट्रेट घोलकर छिड़काव करना भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इससे फसल को जरूरी पोषण मिलता है और तेज गर्मी के कारण होने वाला नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सब्जी की फसल में कीट से बचाव पर दें ध्यान
गर्मी बढ़ने के साथ ही सब्जियों में कीट और रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय सब्जियों में चेपा नामक कीट का हमला होने की संभावना ज्यादा रहती है। इसलिए किसान लगातार फसल की निगरानी करते रहें।
यदि इस कीट का असर दिखाई दे तो सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड दवा का छिड़काव किया जा सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि दवा का छिड़काव सब्जी की तुड़ाई के बाद ही किया जाए। साथ ही छिड़काव के बाद लगभग एक सप्ताह तक सब्जियां नहीं तोड़नी चाहिए ताकि दवा का असर पूरी तरह खत्म हो सके।
प्याज की फसल में नीला धब्बा रोग का खतरा
इस मौसम में प्याज की फसल में नीला धब्बा रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिन खेतों में प्याज की फसल समय पर बोई गई है वहां इस रोग की निगरानी करना बहुत जरूरी है।
यदि फसल में रोग के लक्षण दिखाई दें तो किसान डाएथेन एम पैंतालीस दवा का छिड़काव कर सकते हैं। इसे पानी में घोलकर खेत में छिड़काव करने से रोग के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है और फसल सुरक्षित रहती है।
सब्जियों में विषाणु जनित रोग से बचाव के उपाय
तापमान बढ़ने के दौरान कई सब्जी फसलों में विषाणु जनित रोग तेजी से फैल सकते हैं। भिंडी मिर्च टमाटर नींबू और पपीता जैसी फसलों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान डाइमिथोएट या एसीफेट जैसी दवाओं का घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे फसलों को रोग से बचाने में मदद मिलती है और पौधों की वृद्धि भी बेहतर रहती है।
जायद फसल की तैयारी शुरू करने का सही समय
मार्च के अंतिम पखवाड़े से लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह तक जायद फसल की तैयारी शुरू करने का सही समय माना जाता है। किसान इस समय खीरा बोतल लौकी तुरई कद्दू करेला खीरा और टिंडा जैसी सब्जियों की बुवाई कर सकते हैं।
इसके साथ ही जायद मूंग की खेती भी इस मौसम में अच्छी मानी जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आई पी एम 0203 पी डी एम 139 और एस एम एल 668 जैसी किस्में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन देने वाली साबित हो सकती हैं।
गर्मी के मौसम की शुरुआत किसानों के लिए कई चुनौतियां लेकर आती है लेकिन सही समय पर वैज्ञानिक सलाह अपनाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। यदि किसान नियमित निगरानी करें और समय पर पोषक तत्व और दवाओं का उपयोग करें तो गेहूं जौ और सब्जियों की पैदावार पर गर्मी का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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