ताजमहल में 30 फीट नीचे शाहजहाँ-मुमताज की असली कब्रों तक पहुँचे अफसर, जानें क्यों खुला तहखाना
आगरा । आगरा के ताजमहल में आज एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल देखने को मिली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम ताजमहल के मुख्य गुंबद के ठीक नीचे स्थित असली मजारों (Real Graves) वाले तहखाने में उतरी। यह वार्षिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण इसे हमेशा उत्सुकता से देखा जाता है।
एएसआई के अधिकारियों के अनुसार, यह एक नियमित तकनीकी निरीक्षण था। टीम यह जांचने के लिए नीचे उतरी कि तहखाने की दीवारों में कोई नमी तो नहीं है या नींव की मजबूती में कोई कमी तो नहीं आई।असली कब्रों वाले हिस्से को साल में बहुत कम बार खोला जाता है। इस दौरान वहां की विशेष रूप से सफाई की गई और वेंटिलेशन (हवा के आवागमन) की जांच की गई। जब अफसर नीचे उतरे, तो मुख्य गुंबद के पास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और आम पर्यटकों का प्रवेश उस विशेष गलियारे में कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।
ऊपर की सजावटी कब्रों की तुलना में नीचे की असली कब्रें काफी सादी हैं, जो इस्लामी परंपराओं के अनुरूप हैं। मुमताज महल की कब्र पर खुदा हुआ है— 'मरकदे मुनव्वर मुमताज महल' (मुमताज महल की रोशन कब्र)। यह तहखाना इस तरह बनाया गया है कि ऊपर भीषण गर्मी होने के बावजूद यहाँ का तापमान काफी कम और स्थिर रहता है।
इसके साथ ही शाहजहां के 371वें उर्स की औपचारिक शुरुआत हो गई।
उर्स के पहले दिन ASI और उर्स कमेटी की ओर से कब्रों पर फूलों की चादर चढ़ाई गई और गुसल की रस्म (चंदन का लेप) अदा की गई। यह उर्स तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान, कव्वाली और देश की खुशहाली के लिए दुआएं की जाएंगी।
उर्स के दौरान ताजमहल में पर्यटकों और जायरीनों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा। 15 और 16 जनवरी: दोपहर 2 बजे से सूर्यास्त तक। 17 जनवरी: सूर्योदय से सूर्यास्त तक।
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