ईरान युद्ध का असर भारत पर खाद्य तेल महंगा होने के संकेत, सोयाबीन के दाम बढ़ सकते हैं किसानों की बढ़ सकती है कमाई
दुनिया में जब भी किसी बड़े क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो उसका असर सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्था और खेती पर भी दिखाई देता है। इस समय मध्य एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और इस बढ़ते तनाव की आंच अब भारत तक पहुंचने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति का असर भारत के खाद्य तेल बाजार और उर्वरक आपूर्ति पर पड़ सकता है। इससे आने वाले समय में किसानों और आम लोगों दोनों को कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
उर्वरक के कच्चे माल की आपूर्ति पर बढ़ सकता है दबाव
मिडिल ईस्ट में चल रहे इस युद्ध का असर उर्वरक उद्योग पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। सॉल्युबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता के कारण बंदरगाहों पर कंटेनरों की कमी और जाम की स्थिति बन सकती है।
भारत अपनी सल्फर की बड़ी जरूरत कतर यूएई और ओमान जैसे देशों से पूरी करता है। यही सल्फर डीएपी और एसएसपी जैसे उर्वरकों के उत्पादन में महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है। अगर युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो उर्वरकों के उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
ये भी पढ़ें 30 से 45 दिन में तैयार होने वाली यह खेती किसानों को दे रही लाखों की कमाई कम लागत में बड़ा मुनाफाविशेषज्ञों का कहना है कि जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन से पहले अगर कच्चे माल की आपूर्ति में समस्या आई तो घरेलू बाजार में उर्वरक की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों के लिए खेती की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
ये भी पढ़ें 1 एकड़ में पान की खेती से कमाएं 10 लाख तक सालाना, कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने वाली नकदी फसलखाद्य तेल के दाम बढ़ने की संभावना
भारत हर साल बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करता है। अनुमान के अनुसार भारत करीब 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल विदेशों से मंगाता है। इसमें सूरजमुखी तेल का हिस्सा भी काफी बड़ा है जिसकी आपूर्ति मुख्य रूप से रूस यूक्रेन और अर्जेंटीना से होती है।
अगर युद्ध के कारण जहाजों को लाल सागर मार्ग से हटकर लंबा रास्ता अपनाना पड़ा तो माल पहुंचने में देरी और भाड़ा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इससे खाद्य तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
तेल की कीमत बढ़ने का असर सोयाबीन बाजार पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य तेल महंगा होने पर सोयाबीन के दाम में भी तेजी देखने को मिल सकती है। कुछ सोया प्लांटों ने पहले ही सोयाबीन की खरीदी कीमतों में बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया है।
अफगानिस्तान के साथ व्यापार पर भी पड़ सकता है असर
मध्य एशिया में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ खाद्य तेल और उर्वरक तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापार पर भी पड़ सकता है। इस समय पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
भारत से अफगानिस्तान को खाद्यान्न फल सब्जी मसाले बीज और कई कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में भेजे जाते हैं। अगर क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो इन उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है। निर्यात में रुकावट आने से कई कृषि उत्पादों के स्थानीय दाम में गिरावट भी देखी जा सकती है।
यूरोप और मध्य पूर्व निर्यात पर भी असर संभव
भारतीय कृषि उत्पादों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व और यूरोप के देशों में भी भेजा जाता है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार भू राजनीतिक तनाव और डॉलर रुपये के उतार चढ़ाव से बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
भारत अपने ऑयलमील निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत मध्य पूर्व और करीब 15 प्रतिशत यूरोप भेजता है। अगर समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो कृषि बागवानी और फूलों से जुड़े उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।
शिपिंग लागत बढ़ने से बढ़ सकती है आयात की कीमत
मध्य पूर्व से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर शिपिंग कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है। फ्रांस की कंटेनर कंपनी सीएमए सीजीएम ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले कार्गो पर प्रति कंटेनर दो हजार से चार हजार डॉलर तक का आपातकालीन कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लागू किया है।
इससे आयातकों की लागत बढ़ रही है और भविष्य में बीमा प्रीमियम में भी बढ़ोतरी हो सकती है। उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो खाद्य तेल आयात और उर्वरकों के कच्चे माल की आपूर्ति पर गंभीर दबाव बन सकता है।
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