अमेरिका, उसके साझेदारों ने 11 महत्वपूर्ण खनिज समझौतों पर किये हस्ताक्षर
वाशिंगटन। अमेरिका और उसके साझेदारों ने महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक उपायों की घोषणा की है। अमेरिका ने अर्जेंटीना, कुक द्वीप समूह, इक्वाडोर, गिनी, मोरक्को, पैराग्वे, पेरू, फिलीपींस, संयुक्त अरब अमीरात और उज्बेकिस्तान सहित अन्य देशों के साथ 11 नए द्विपक्षीय महत्वपूर्ण खनिज संरचना एवं समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किया है।
अमेरिका ने विश्व के साझेदारों एवं सहयोगियों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण खनिजों एवं दुर्लभ धातुओं के वैश्विक बाजार को नया आकार देने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है, जिससे विश्व की सबसे उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य के आर्थिक विकास को आधार प्रदान करने वाली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया जा सके। पिछले पाँच महीनों में हस्ताक्षरित 10 ढाँचागत समझौतों और बातचीत के दौरान पहले ही संपन्न हो चुके 17 अतिरिक्त समझौतों पर आधारित ये करार महत्वपूर्ण खनिजों की कूटनीति में अभूतपूर्व नेतृत्व को दर्शाते हैं। ये रूपरेखाएं मूल्य निर्धारण संबंधी चुनौतियों, परियोजना विकास, निष्पक्ष एवं पारदर्शी बाजारों, आपूर्ति श्रृंखला की कमियों और वित्तपोषण तक पहुंच बढ़ाने में सहयोग की नींव रखती हैं।
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट, आंतरिक मामलों के सचिव डग बर्गम, ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मिलकर 2026 क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल की मेज़बानी की। इस सम्मेलन में 54 देशों और यूरोपीय आयोग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 43 विदेशी मंत्री और अन्य मंत्री शामिल थे।
यह मंत्रीस्तरीय बैठक महत्वपूर्ण खनिजों की कूटनीति पर केंद्रित अब तक की सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों में से एक मानी जा रही है। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, मैक्सिको, कोरिया गणराज्य, सऊदी अरब, ब्रिटेन, यूक्रेन और कई अन्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने एक सुरक्षित, विविध एवं लचीले वैश्विक खनिज बाजार के लिए एक साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ आए। उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा एवं स्वायत्त प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ धातुएं आवश्यक हैं। जैसे-जैसे ये प्रौद्योगिकियां वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को परिवर्तित कर रही हैं, महत्वपूर्ण सामग्रियों तक विश्वसनीय पहुंच की मांग तेजी से बढ़ रही है।
वर्तमान में इन सामग्रियों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यधिक केंद्रित बनी हुई हैं, जिससे वे राजनीतिक दबाव एवं व्यवधान के प्रति संवेदनशील हैं। मंत्रिस्तरीय बैठक में, अमेरिका और उसके साझेदारों ने नए स्रोतों की आपूर्ति को विकसित करने, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने और एक सुरक्षित, पारदर्शी एवं मजबूत लचीला संपूर्ण बाजार बनाने उस वास्तविकता को बदलने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
विदेश सचिव रुबियो ने खनिज सुरक्षा साझेदारी (एमएसपी) की उत्तरवर्ती संस्था के रूप में संसाधन भू-रणनीतिक सहभागिता मंच (फोर्ज) के गठन की घोषणा की। जून तक दक्षिण कोरिया गणराज्य की अध्यक्षता में, फोर्ज नीति एवं परियोजना दोनों स्तरों पर साहसिक एवं कार्रवाई-उन्मुख सहयोग के साथ वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करेगा।
यह मानते हुए कि सरकारें अकेले वैश्विक मांग को पूरा नहीं कर सकतीं, अमेरिका पैक्स सिलिका जैसी पहलों के माध्यम से निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रहा है, जो खनन, शोधन, प्रसंस्करण, अंतिम उपयोग अनुप्रयोगों एवं पुनर्चक्रण में निवेश को बढ़ावा देता है। मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले, तीन फरवरी को अमेरिकी अधिकारियों ने आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों एवं निवेश के अवसरों पर चर्चा करने के लिए वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं के साथ एक बैठक की। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने सहयोगी देशों के साथ नई साझेदारियों के अंतर्गत प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए खनन क्षेत्र के प्रमुखों का एक कार्य बल भी गठित किया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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