रूसी राजदूत का बयान: तेल संकट में भारत का साथ देगा रूस, लेकिन चुनाव भारत का होगा
नई दिल्ली। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने गुरुवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को बातचीत से सुलझाने की अपील की। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ने पर भी चिंता जताई। रूसी राजनयिक ने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आपूर्ति के लिए किसे चुना जाए यह फैसला भारत को ही लेना होगा, भले ही मॉस्को हमेशा भारत को तेल सप्लाई करने के लिए तैयार रहा है। नई दिल्ली में अलीपोव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "समाधान हमेशा बातचीत से होता है। संघर्ष जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए।" जब उनसे पूछा गया कि युद्ध कब तक चलेगा तो उन्होंने कहा, "मुझे कोई पता नहीं है।
यह सवाल अमेरिका से पूछना चाहिए।" होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित बंद होने की अटकलों के बीच अलीपोव ने कहा, "आपूर्ति और आपूर्ति स्रोत पर फैसला भारत को करना है। हम हमेशा भारत को तेल आपूर्ति करने के लिए तैयार रहे हैं।" रूस ने 28 फरवरी को बिना कारण ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले की निंदा की थी। साथ ही, हालात को राजनीतिक तथा कूटनीतिक समाधान की ओर वापस लाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया था। रूस के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को ईरान की पहल पर टेलीफोन पर बातचीत की। फोन कॉल के बाद रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "ईरानी मंत्री ने अमेरिका और इजरायल के हमले को रोकने के लिए ईरानी लीडरशिप के कदमों की जानकारी दी, जिसने एक बार फिर ईरानी न्यूक्लियर प्रोग्राम के शांतिपूर्ण हल के लिए बातचीत में रुकावट डाली है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की योजना की भी घोषणा की।" सर्गेई लावरोव ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए इस अकारण सशस्त्र हमले की निंदा की, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और मानकों का उल्लंघन है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा के गंभीर परिणामों की पूरी तरह अनदेखी करता है। मंत्री ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ हमलों को तुरंत रोकने और स्थिति को राजनीतिक व कूटनीतिक समाधान की ओर वापस लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।”
बयान के अनुसार, लावरोव ने कहा कि रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अन्य मंचों पर अंतरराष्ट्रीय कानून, आपसी सम्मान और हितों के संतुलन के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान खोजने में मदद करने के लिए तैयार है। पश्चिम एशिया में यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हवाई हमले किए, जिनका उद्देश्य तेहरान की मिसाइल क्षमता और व्यापक सैन्य ढांचे को कमजोर करना था। इस अभियान की शुरुआती कार्रवाई में ईरानी नेतृत्व के कई वरिष्ठ लोग मारे गए, जिनमें सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे। इसके बाद ईरान ने व्यापक जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जो पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों, क्षेत्रीय राजधानियों और सहयोगी बलों को निशाना बनाते रहे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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