चीन को सस्ते तेल से मिल रही थी ताकत, वेनेजुएला पर अमेरिका की सख्ती के पीछे रुबियो का खुलासा
वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों से कहा है कि निकोलस मादुरो के शासन के तहत वेनेजुएला पश्चिमी गोलार्ध में चीन, रूस और ईरान के लिए एक रणनीतिक अड्डा बन गया था। उन्होंने कहा कि बीजिंग वेनेजुएला से भारी छूट पर तेल हासिल कर अमेरिका और उसके आसपास के क्षेत्रों के बेहद करीब अपना प्रभाव बढ़ा रहा था।
रुबियो ने कहा, “यह वेनेजुएला की जनता का तेल है, जिसे वस्तु-विनिमय (बार्टर) के रूप में चीन को दिया जा रहा था।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन, रूस और ईरान वेनेजुएला से अपने ऑपरेशन चला रहे थे। उन्होंने इस स्थिति को अमेरिका के लिए एक बेहद गंभीर रणनीतिक खतरा बताया। यह खतरा दुनिया के किसी दूर-दराज हिस्से में नहीं, बल्कि उसी गोलार्ध में था, जहां हम सभी रहते हैं।” रुबियो ने कहा कि मादुरो सरकार के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का मकसद इसी स्थिति को खत्म करना और दोबारा रणनीतिक बढ़त हासिल करना था। “यह हालात अस्वीकार्य थे और इन्हें सही करना जरूरी था।” उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व में वेनेजुएला में चीन की सस्ते तेल तक पहुंच में भारी कमी आई है। चीन वेनेजुएला का तेल खरीद सकता है, लेकिन अब उसे वही कीमत चुकानी होगी, जो दुनिया के बाकी देश चुकाते हैं। रुबियो ने बताया कि प्रतिबंधित वेनेजुएलाई तेल से होने वाली आय अब अमेरिकी निगरानी में रखी जा रही है। उससे मिलने वाला पैसा एक ऐसे खाते में जमा होगा, जिस पर हमारी निगरानी होगी और उस धन का इस्तेमाल वेनेजुएला की जनता के हित में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध में चीन की व्यापक रणनीति विचारधारा नहीं, बल्कि आर्थिक दबदबे पर आधारित है। उन्हें दूरसंचार में गहरी दिलचस्पी है। वे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निर्माण और नियंत्रण में रुचि रखते हैं। उन्हें अहम खनिज संसाधनों के अधिकार चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अक्सर “खराब समझौतों” और कर्ज पर निर्भरता के जरिए दूसरे देशों पर अपनी पकड़ बनाती हैं। रुबियो ने दावा किया कि क्षेत्र में चीन का प्रभाव अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। उन्होंने पनामा के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से बाहर निकलने और लैटिन अमेरिका में राजनीतिक बदलावों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वेनेजुएला दोबारा हमारे रीजन में ईरान, रूस और चीन का खेल का मैदान न बने।
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