दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने से किया इनकार, महिपालपुर को रंगपुरी नाम देने की याचिका खारिज
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने के मामले में साफ कहा कि वह सरकार या दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने महिपालपुर मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर रंगपुरी मेट्रो स्टेशन करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
यह याचिका रंगपुरी गांव के निवासियों के संगठन 'कल्याण संघ' ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि महिपालपुर मेट्रो स्टेशन उनके इलाके रंगपुरी गांव के बहुत करीब है और आसपास के लोग इसे रंगपुरी के नाम से ही जानते हैं, इसलिए स्टेशन का नाम बदलकर रंगपुरी मेट्रो स्टेशन किया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को सुविधा हो और इलाके की पहचान बनी रहे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा नाम से यात्रियों को भ्रम होता है और स्थानीय निवासियों को अपनी पहचान से वंचित महसूस होता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मेट्रो स्टेशनों के नामकरण का फैसला सरकार का नीतिगत मामला है। यह कार्यकारी क्षेत्र में आता है और न्यायालय इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता, जब तक कि नामकरण प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी न हो या संविधान के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन न कर रही हो। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई दलीलें पर्याप्त नहीं हैं कि नाम बदलना जरूरी हो। नामकरण में स्थानीय भावनाओं का ध्यान रखा जाता है, लेकिन यह सरकार की नीति और प्रशासनिक सुविधा पर निर्भर करता है।
कोर्ट ने आगे कहा कि डीएमआरसी और सरकार ने पहले ही इस तरह की मांगों पर विचार किया है और कई स्टेशनों के नाम बदलने के फैसले लिए हैं, लेकिन हर मांग को स्वीकार करना जरूरी नहीं है। याचिका में कोई ऐसा ठोस आधार नहीं दिखा कि मौजूदा नाम असंवैधानिक या भेदभावपूर्ण है, इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो सरकार या डीएमआरसी के सामने सीधे अपनी मांग रख सकते हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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