2027 की जाति जनगणना से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार,कहा- जनगणना विशेषज्ञों का काम है
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2027 में होने वाली जाति जनगणना के तरीके, उसके वर्गीकरण और सत्यापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार करें।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जाति आंकड़ों की पहचान के लिए कोई पूर्व-निर्धारित आंकड़ा मौजूद नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम और उसके नियमों के मुताबित होती है। कानून के मुताबिक संबंधित अधिकारी ये तय करते हैं कि जनगणना किस तरीके से और किन बिंदुओं पर की जाए।
याचिका आकाश गोयल ने दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुक्ता गप्ता ने कहा कि जाति संबंधी सूचना दर्ज करने, उसे वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रश्नावली को सार्वजनिक किया जाए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना निदेशालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नागरिकों की जाति पहचान दर्ज करने के लिए कौन से मानदंड अपनाए जाएंगे। बतादें कि 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार है जब व्यापक स्तर पर जाति आधारित गणना होगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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