'मदर ऑफ ऑल डील्स': भारत-ईयू व्यापार समझौते से सस्ती होंगी यूरोपीय कारें और वाइन; कपड़ा उद्योग को मिलेगा बड़ा बूस्ट..!
नई दिल्ली। भारत और 27 देशों का समूह यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत कपड़े एवं जूते-चप्पल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के साथ-साथ कारों और वाइन पर आयात शुल्क में कटौती संभव है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को कहा कि इस समझौते में कई सेवा क्षेत्रों के नियमों में ढील दिए जाने की भी उम्मीद है। इस समझौते के लिए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 24 जनवरी को चार दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच चुकी हैं। वह यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर बैठक करेंगी। इस बैठक में समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने और संयुक्त वक्तव्य में घोषणा किए जाने की संभावना है।
जानकारी के मुताबिक भारत ने अपने श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे कपड़ा, चमड़ा, परिधान, रत्न एवं आभूषण और हस्तशिल्प के लिए शून्य-शुल्क पहुंच पर जोर दिया है। भारत द्वारा यूके, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए पिछले व्यापार समझौतों में भी यह एक प्रमुख मांग रही है जिसे स्वीकार किया गया है। वहीं, ईयू अपने ऑटोमोबाइल और वाइन सहित मादक पेय पदार्थों के लिए शुल्क में कटौती की मांग कर रहा है।
दरअसल भारत ने ब्रिटेन के साथ अपने व्यापार समझौते में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए कोटा-आधारित रियायतें दी हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ समझौतों में वाइन को शामिल किया गया है। भारत ने ऑस्ट्रेलियाई वाइन को 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से शुल्क रियायतें प्रदान की हैं।
भारत और ईयू 27 जनवरी को 18 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद एफटीए के संपन्न होने की घोषणा करेगा। ये बातचीत 2007 में शुरू हुई थी। यूरोपीय संघ में भारतीय सामानों पर औसत शुल्क 3.8 फीसदी है, लेकिन श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर यह लगभग 10 फीसदी है। वहीं, यूरोपीय संघ के सामानों पर भारत का औसत शुल्क 9.3 फीसदी है, जिसमें ऑटोमोबाइल (35.5 फीसदी) और रसायनों पर उच्च शुल्क शामिल है।
उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ (ईयू) यूरोपीय देशों का एक संगठन है। यूरोप के 50 देशों में से 27 देश ईयू के सदस्य हैं। ईयू एक राष्ट्रीय इकाई की तरह काम करता है और इसकी अपनी मुद्रा, झंडा, केंद्रीय बैंक, संसद और न्यायालय हैं। ईयू के सदस्य देशों के सभी नागरिकों को ईयू नागरिक कहा जाता है। इसमें वर्तमान में 27 सदस्य देश हैं, जिनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लात्विया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन शामिल हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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