कट्टरपंथियों को चुनौती! खालिदा जिया की पोती बोलीं, 'बिना महिलाओं के गवर्नेंस में सुधार असंभव'
ढाका । बांग्लादेश में आम चुनावों के लिए वोटिंग की उलटी गिनती शुरू हो गई है। ऐसा वर्षों बाद हो रहा है कि देश में कट्टरपंथी हावी हैं और महिलाओं की भागीदारी न के बराबर है। इस सबके बीच भूतपूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पोती और बीएनपी चीफ तारिक रहमान की बेटी जाइमा रहमान ने सियासी दलों से राजनीति में महिलाओं की बराबरी की बात की है।
रविवार को ढाका में आयोजित एक इवेंट के दौरान उन्होंने साइबर बुलिंग का जिक्र किया। जाइमा ने राजनीतिक पार्टियों से स्ट्रक्चरल रुकावटों को दूर करने और महिलाओं के लिए एक रास्ता बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पॉलिसी बनाने में उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना सार्थक गवर्नेंस सुधार असंभव है।
विमेन इन डेमोक्रेसी (विंड) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जाइमा ने राजनीतिक पार्टियों से महिला नेताओं को साइबर-बुलिंग और शारीरिक खतरों से बचाने के लिए एक कानूनी आचार संहिता अपनाने का आह्वान किया।
जाइमा ने कहा, "राजनीतिक पार्टियों को अपनी महिला नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्हें उनके साथ खड़ा रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनौतियों का सामना करते समय उन्हें कभी अकेला न छोड़ा जाए।"
उन्होंने महिलाओं को प्रभावी पॉलिसी लागू करने में सक्षम बनाने के लिए राजनीतिक पहुंच, वित्तीय संसाधनों और बोलने की आजादी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "अगर महिलाएं पॉलिसी बनाने में शामिल नहीं होंगी, तो हम जरूरी नजरिए को कभी पूरी तरह से नहीं समझ पाएंगे," और कहा कि सिस्टमैटिक रुकावटें महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बाधा डाल रही हैं।
नेतृत्व विकास के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने छात्र नेतृत्व और स्थानीय सरकार के बीच की खाई को पाटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें छात्र राजनीति से स्थानीय सरकार तक एक रास्ता बनाने की जरूरत है, और हमें इसे बनाए रखना चाहिए। इसके बिना, हम प्रतिभाशाली नेताओं को अवसर प्रदान नहीं कर सकते।"
उन्होंने लैंगिक असमानताओं पर कहा: "पुरुषों को अक्सर स्थापित मार्गदर्शन से फायदा होता है, लेकिन महिलाओं को सांस्कृतिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। राजनीतिक पार्टियों को मेंटरशिप और ट्रेनिंग कार्यक्रमों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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