किसानों का जोखिम कम करने, आय बढ़ाने के लिए किये गये पहल के दिख रहे हैं परिणाम : मोदी
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार ने किसानों का जोखिम कम करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए जो पहल किये हैं उनके परिणाम दिख रहे हैं। मोदी ने बजट के पश्चात राष्ट्रीय वेबीनार की श्रृंखला में शुक्रवार को तीसरी वेबीनार का उद्घाटन करते हुए कहा कि करीब 10 करोड़ किसानों को चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। दिन भर के इस वेबीनार का विषय 'कृषि और ग्रामीण क्षेत्र' में बदलाव है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में हुए सुधारों से अब किसानों को उनकी उपज पर डेढ़ गुना तक प्रतिफल मिल रहा है। किसानों को अब तीन चौथाई कर्ज संस्थागत क्षेत्र से मिल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, "संस्थागत क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।" उन्होंने कहा कि पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये के दावों के समाधान किए गए हैं।
मोदी ने कहा, "ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का जोखिम बहुत कम हुआ है और उन्हें एक बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है। हम फसल विविधता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। खाद्य तेल और दलहन पर राष्ट्रीय मिशन और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन, दोनों ही कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।
उन्होंने कहा कि इस प्रगति को और आगे ले जाने के लिए हमें वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। श्री मोदी ने कहा कि पशुधन का स्वास्थ्य भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत अब टीकों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है। पशुओं को खुरपका-मुँहपका (फुट एंड माउथ) रोग से बचाने के लिए अब तक 125 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं।
श्री मोदी ने कहा कि ये टेक्नोलॉजी की सदी है, और सरकार का बहुत जोर कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी संस्कृति लाने पर भी है। प्रधानमंत्री ने वेबिनार में शामिल लोगों से भारतीय कृषि के भविष्य के बारे में सोने और योजनाओं के क्रियान्वयन को कारगर बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, "आज दुनिया स्वास्थ्य के संबंध में ज्यादा सतर्क है। समग्र स्वास्थ्य और उसमें ऑर्गेनिक भोजन पर बहुत रुचि है। भारत में हमें रसायनिक मुक्त खेती पर बल देना ही होगा, प्राकृतिक खेती पर बल देना होगा।" उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से रसायनिक मुक्त उत्पाद से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए प्रमाणन और प्रयोगशाला की व्यवस्था करने के बारे में सरकार सोच रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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