एनआईए ने अमृतसर मंदिर ग्रेनेड हमले के सिलसिले में कई जगहों पर छापे मारे..जानें पूरी खबर
अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर में मारे गए इन छापों में कई आपत्तिजनक चीजें जब्त की गईं, जिनमें मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और कई दस्तावेज़ शामिल हैं।
यह मामला पिछले साल 14 मार्च की रात को अमृतसर में शेर शाह रोड पर खंडवाला में ठाकुर द्वारा सनातन मंदिर के बाहर हुए धमाके से जुड़ा है।
एजेंसी की जांच में बाद में पता चला कि यह हमला कई विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर किया गया था, जिन्होंने इलाके में दहशत फैलाने के लिए विस्फोटक और हथियार मुहैया कराए थे।
एजेंसी के मामले की जांच से यह भी पता चला कि ये हैंडलर्स एक बड़ी आतंकी साजिश के तहत ऐसे ग्रेनेड हमले करने के लिए भारत में लोगों की भर्ती कर रहे थे और उन्हें धन दे रहे थे।
एनआईए ने राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने के बाद ग्रेनेड फेंकने वाले आरोपियों की पहचान विशाल और गुरसिदक के रूप में की। विशाल को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गुरसिदक की मौत हो चुकी है।
बताया जाता है कि दोनों को विस्फोटक कादियां, बटाला के शरणजीत कुमार से मिले थे, जो शुरू में झारखंड और बिहार भाग गया था, लेकिन सितंबर में एनआईए ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
शरणजीत को विदेशी हैंडलर्स से खेप मिलती थी, ने तीन हैंड ग्रेनेड और एक पिस्तौल भी छिपा रखी थी, जिसे बाद में एजेंसी ने गुरदासपुर जिले की एक जगह से बरामद किया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
