दक्षिण कोरिया: सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, दो की मौत
ये भी पढ़ें यूएस-इंडिया ट्रेड डील से भारत का 2030 तक 250 बिलियन डॉलर का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट का टारगेट बढ़ासोल। दक्षिण कोरिया की सेना का एक हेलीकॉप्टर सोमवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। सेना ने बताया कि गैप्योंग के उत्तरी काउंटी में ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान एक एएच-1एस कोबरा अटैक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिससे उसमें सवार दोनों क्रू मेंबर्स की मौत हो गई।न्यूज एजेंसी योनहाप ने आधिकारिक बयान में बताया कि हेलीकॉप्टर सुबह 11 बजे (स्थानीय समयानुसार) के करीब नीचे गिरा लेकिन इसका कारण अभी साफ नहीं है। दोनों क्रू मेंबर्स को पास के अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सेना ने इस दुर्घटना के बाद सभी एएच-1एस हेलीकॉप्टरों का ऑपरेशन रोक दिया है और हादसे के कारणों की जांच के लिए एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम बनाई है।
हेलिकॉप्टर में सवार दो वारंट ऑफिसर—जिनकी उम्र 30 और 50 साल थी—को कार्डियक अरेस्ट की हालत में हॉस्पिटल ले जाया गया था, लेकिन बचाया नहीं जा सका। अधिकारियों ने बताया कि हेलीकॉप्टर में कोई आग नहीं लगी थी और न ही कोई धमाका हुआ था। हादसे के समय हेलीकॉप्टर में कोई हथियार भी नहीं था।
यह हादसा क्रू मेंबर्स को इमरजेंसी लैंडिंग प्रक्रियाओं से परिचित कराने के लिए की जा रही फ्लाइट ट्रेनिंग के दौरान हुआ।
एक आर्मी अधिकारी ने बताया कि अभी यह जांच की जानी बाकी है कि हादसा ट्रेनिंग पूरी करने के बाद हेलिकॉप्टर के बेस पर लौटते समय हुआ या ट्रेनिंग के दौरान।
अधिकारी ने आगे कहा, "(हेलिकॉप्टर) में रिकॉर्डिंग उपकरण लगे थे, इसलिए डिवाइस की रिकवरी हादसे के कारण का पता लगाने में काफी मददगार होगी।"
द कोरिया टाइम्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब की यात्रा पर गए रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक को इस हादसे के बारे में जानकारी दी गई है और उन्होंने तुरंत फॉलो-अप कदम उठाने को कहा है।
आन ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, "रक्षा मंत्रालय इस हादसे पर प्रतिक्रिया देने और कारण का सख्ती से पता लगाने के लिए सभी संभावित संसाधनों को जुटाएगा।"क्रैश हुआ एएच-1एस हेलिकॉप्टर 1991 में तैनात किया गया था। 1988 में पहली बार यह मॉडल पेश किया गया था। आर्मी ने 2028 में अपने पुराने कोबरा हेलिकॉप्टरों के बेड़े को रिटायर करना शुरू करने की योजना बनाई थी और उनका लक्ष्य 2031 तक इस प्रक्रिया को पूरा करना था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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