बरेली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: बागी PCS अलंकार अग्निहोत्री को पुलिस ने कस्टडी में लिया; गाड़ियों के आगे लेटे समर्थक, लखनऊ लाए गए
बरेली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के इतिहास में बुधवार का दिन एक 'काले अध्याय' और 'हाई-वोल्टेज ड्रामे' के रूप में दर्ज हो गया। अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान और यूजीसी (UGC) के नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को जब पुलिस प्रशासन की टीम कस्टडी में लेकर बरेली से बाहर निकालने पहुंची, तो शहर की सड़कें रणक्षेत्र बन गईं। अपने 'नायक' को बचाने के लिए सैकड़ों समर्थक पुलिस की गाड़ियों के आगे लेट गए, रोए और पुलिस से भिड़ गए। फिलहाल, कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें लखनऊ लाया गया है।
हाउस अरेस्ट और 'सीसीटीवी' की पहरेदारी
वह 'इशारा' जिसने सनसनी मचा दी
अंदर अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान अलंकार अग्निहोत्री खिड़की पर आए। पहले उन्होंने समर्थकों का अभिवादन करने के लिए 'विक्ट्री साइन' (जीत का निशान) बनाया, लेकिन उसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी उंगलियों को 'गन' (पिस्तौल) की तरह अपनी कनपटी पर रखा और 'गोली मारने' का इशारा किया। इस मंजर को देखकर वहां मौजूद भीड़ सिहर उठी। अलंकार पहले दिन से ही अपनी जान को खतरा बता रहे हैं, और इस इशारे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
समर्थकों का सैलाब और पुलिस से हाथापाई
दोपहर करीब 1:30 बजे जैसे ही तीन पुलिस की गाड़ियां अलंकार को लेकर बाहर निकलीं, वहां मौजूद 400 से अधिक समर्थकों का सब्र टूट गया।
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सड़क पर संग्राम: समर्थक चीखते-चिल्लाते हुए गाड़ियों के सामने लेट गए।
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वर्दी पर हाथ: पुलिस जब भीड़ को हटाने लगी, तो हाथापाई की नौबत आ गई। एक समर्थक इंस्पेक्टर के ऊपर गिर पड़ा, जिसके बाद इंस्पेक्टर ने अपनी वर्दी फटने और स्टार नोचने का आरोप लगाया।
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भावुक मंजर: लोग रोते हुए कह रहे थे, "हमारे अधिकारी को मार दिया जाएगा, हम गाड़ी आगे नहीं बढ़ने देंगे।" करीब 20 मिनट तक बरेली की सड़कों पर अराजकता की स्थिति बनी रही।
'गृहयुद्ध' की चेतावनी: क्या है असल मुद्दा?
कस्टडी में लिए जाने से ठीक पहले अलंकार ने मीडिया से बातचीत में एक बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा:
"यूजीसी का नया नियम छात्रों को जातियों में बांट देगा। इससे शिक्षण संस्थानों में कलह बढ़ेगी और देश में गृहयुद्ध (Civil War) जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। मैं समाज को बंटते हुए नहीं देख सकता, इसलिए मैंने कुर्सी का मोह छोड़ा है।"
गंतव्य 'गुप्त' या 'लखनऊ'?
प्रशासन ने पहले उन्हें एक निजी वाहन से अज्ञात स्थान पर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन समर्थकों के भारी विरोध के बाद उन्हें पुलिस कस्टडी में लखनऊ लाया गया है। उनके घर के बाहर अभी भी सुरक्षा बल तैनात है और कुछ समर्थक 'दामोदर पार्क' में धरने पर बैठ गए हैं।
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