बाजार की पाठशाला : सोना खरीदने और बेचने से पहले समझ लें टैक्स के नियम, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान!
ये भी पढ़ें मध्य पूर्व संकट से चमका सोना: लगातार पांचवें दिन कीमतों में उछाल, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भावनई दिल्ली। भारत में सोना सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षित निवेश और परंपरा दोनों माना जाता है। शादी-ब्याह, त्योहारों और भविष्य की बचत के लिए लोग बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं। लेकिन अक्सर निवेशक यह भूल जाते हैं कि सोना खरीदने, रखने और बेचने के हर चरण में टैक्स से जुड़े नियम लागू होते हैं। अगर इन नियमों की सही जानकारी न हो तो कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला सकता है। ऐसे में सोने में निवेश से पहले टैक्स की पूरी समझ होना बेहद जरूरी है।
सोना खरीदते समय सबसे पहले जीएसटी का बोझ आता है। चाहे आप गोल्ड ज्वेलरी खरीदें, गोल्ड कॉइन लें या डिजिटल गोल्ड में निवेश करें, सोने की कीमत पर 3 प्रतिशत जीएसटी देना होता है। इसके अलावा, अगर आप ज्वेलरी खरीदते हैं तो उस पर लगने वाले मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना पड़ता है। यानी सोना खरीदते वक्त ही आपकी कुल लागत बढ़ जाती है।
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जब आप सोना बेचते हैं, तब उस पर इनकम टैक्स (कैपिटल गेन्स टैक्स) लगता है। यह टैक्स बिक्री कीमत पर नहीं, बल्कि आपके मुनाफे पर लगाया जाता है। टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि आपने सोना कितने समय तक अपने पास रखा। अगर आप सोना 3 साल (36 महीने) के भीतर बेचते हैं, तो इससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) माना जाता है और यह आपकी सालाना आय में जुड़कर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है।
वहीं, अगर सोना 3 साल से ज्यादा समय बाद बेचा जाता है, तो उस पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स लगता है। इसमें 20 प्रतिशत टैक्स देना होता है, लेकिन साथ ही इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलता है। इंडेक्सेशन के जरिए महंगाई के अनुसार खरीद कीमत बढ़ा दी जाती है, जिससे टैक्सेबल मुनाफा कम हो जाता है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
विरासत में मिले सोने को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, विरासत में सोना मिलने पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन अगर आप उस सोने को बाद में बेचते हैं, तो उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। खास बात यह है कि यहां होल्डिंग पीरियड आपकी खरीद तारीख से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की खरीद तारीख से गिना जाएगा, जिससे आपको वह सोना मिला है।
इनकम टैक्स विभाग घर में रखे जाने वाले सोने की एक सीमा भी तय करता है, बशर्ते सोने का स्रोत वैध हो। आमतौर पर बिना पूछताछ के विवाहित महिला 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम तक सोना रख सकते हैं। इससे ज्यादा सोना रखने की स्थिति में यह साबित करना होता है कि वह विरासत में मिला है या घोषित आय से खरीदा गया है।
डिजिटल गोल्ड पर टैक्स के नियम भी लगभग फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं। इसे खरीदते समय 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है और बेचते समय होल्डिंग पीरियड के आधार पर एसटीसीजी या एलटीसीजी टैक्स देना होता है। कुल मिलाकर, सोना भले ही सुरक्षित निवेश माना जाता हो, लेकिन टैक्स नियमों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। इसलिए सोने में निवेश से पहले टैक्स की पूरी जानकारी रखना जरूरी है, ताकि मुनाफे पर किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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